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अभी तो टेंडर में ही उलझी है पेयजल महायोजना

Fri, 05 May 2017 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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water supply - फोटो : demo
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पेयजल महायोजना पर पहले चरण के काम के लिए एलएंडटी कंपनी का टेंडर इसलिए निरस्त कर दिया गया कि उसने निर्धारित एस्टीमेट से 22 फीसदी अधिक रेट भरा था। जल निगम अब जल्द ही नए सिरे से आवेदन मांगेगा। तय किया गया है कि अब पहले चरण का काम पांच ठेका कंपनियों के बीच बांटा जाएगा, ताकि इसे जल्द पूरा किया जा सके। यह साल पहले स्वीकृत हुई इस योजना का हाल-बेहाल है। अब इस साल के अंत तक ही काम शुरू हो सकेगा।
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 जल निगम ने इस योजना का पहले चरण का काम कराने के लिए 188 करोड़ का एस्टीमेट तैयार किया है। इसके लिए आठ माह पहले टेंडर आमंत्रित किए थे। तीन नामी कंपनियों ने टेंडर डाले थे। एलएंडटी कंपनी के सबसे कम 219 करोड़ रेट डाले थे, लेकिन कंपनी को 188 करोड़ रुपये में ही काम करना था। इसके लिए जल निगम ने कंपनी को नोटिस जारी किया, लेकिन कंपनी तैयार नहीं थी। इस कारण जल निगम की उच्च स्तरीय कमेटी ने कंपनी का टेंडर निरस्त कर दिया है।
‘महायोजना के पहले चरण के काम के लिए जल्द ही नए सिरे से टेंडर निकाले जा रहे हैं। इस बार काम को पांच भागों में बांट दिया गया है, जिसका प्रस्ताव मंजूरी के लिए मुख्यालय भेज दिया है।’
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आईके श्रीवास्तव, मुख्य अभियंता, जल निगम।

 पहले चरण के काम
-तेरह जोन में दस सीडब्लूआर, पंप हाउस और 11 पानी की टंकियां
-तेरह नए जोन में 24 किलोमीटर जल वितरण प्रणाली
- प्रयोगशाला और प्रशासनिक भवन का निर्माण कार्य भी करवाएंगे
- संबंधित स्थानों पर बिजली आपूर्ति के लिए भी काम होगा।
-माताटीला बांध से बबीना जलशोधन केंद्र तक पाइप लाइन

ये हैं सकंटग्रस्त इलाके
महानगर में सबसे प्रभावित सिलवटगंज, गढ़ियागांव, लहरगिर्द, आईटीआई, सिद्धेश्वर नगर, करगुवांजी, पिछोर, गुमनावारा, महाराणा प्रतापनगर, मयूर विहार कॉलोनी सराय, डड़ियापुरा, मद्रासी कॉलोनी, सत्यम कॉलोनी, भगवंतपुरा, कोछाभांवर, सिमरधा, वीरांगना नगर, पाल कॉलोनी, अलीगोल, मेवातीपुरा, बाहर उन्नाव गेट, मुकरयाना, मैला की टौरिया, मसीहागंज, लहरगिर्द, करारी, राजपूत नगर आदि शामिल हैं।

हैंडपंपों की सूची नहीं दे रहे हैं जनप्रतिनिधि
40 करोड़ मिलने के बाद भी नहीं हो पा रहा काम
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
 ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल समस्या दूर करने के लिए शासन ने 40 करोड़ दिए गए हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों ने हैंडपंपों की सूची उपलब्ध नहीं करवाई है। इस कारण काम लटका है।
प्रदेश में सरकार बनते ही मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंड के सभी सातों जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में त्वरित पेयजल समस्या को दूर करने के उद्देश्य से 47 करोड़ का बजट मंजूर किया था। इसमें जल निगम को 1057 नए हैंडपंप और 4334 हैंडपंपों को रीबोर कराने के लिए 40 करोड़ का बजट मिल गया है। हालांकि, इसमें 4.05 करोड़ यूपी एग्रो को भी नए हैंडपंप और रीबोर के लिए दिया गया है। सात करोड़ रुपये पाइप लाइन के रखरखाव के लिए मिलना बाकी है। चूंकि, जल निगम ने नए हैंडपंपों और रीबोर की सूची पहले ही तैयार कर ली थी, लेकिन उसे अमान्य कर दिया गया। साथ ही निर्देश दिए गए कि जो सूची जनप्रतिनिधि उपलब्ध कराएंगे, उन पर ही काम होगा। लेकिन अब तक दो ही जनप्रतिनिधियों ने सूची उपलब्ध कराई हैं। इससे सरकार की मंशा पूरी नहीं हो पा रही है।
 जल निगम के मुख्य अभियंता एके श्रीवास्तव ने कहा कि नए हैंडपंप और रीबोर कराने का काम 31 मई तक पूरा करना है। अगर जल्द सूची मिल जाए तो काम समय पर पूरा हो जाएगा।  मालूम हो कि, मंडल के झांसी जनपद में 225 नए हैंडपंप और 360 रीबोर, ललितपुर जनपद में 162 नए हैंडपंप और 270 रीबोर, जालौन जनपद में 135 नए हैंडपंप और 1620 रीबोर होना है। बबीना विधायक राजीव सिंह पारीछा का कहना है कि ए-दो दिन के भीतर सूची फाइनल कर देंगे।
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