प्रयागराज की ओर जाने का रास्ता आसान करने के लिए झांसी- मानिकपुर के बीच रेल दोहरीकरण का काम शुरू कराया गया लेकिन यह काम काफी पिछड़ चुका है। वैसे तो इस वर्ष दिसंबर तक पूरा किया जाना था लेकिन पिछले दो साल से सिर्फ झांसी-महोबा सेक्शन के बीच ही काम अटका है। बेहद धीमी रफ्तार से काम होने से नियत समय में इसका पूरा होना मुमकिन नहीं दिखता। वहीं, रेल अफसरों का कहना है कई तकनीकी अड़चनों के चलते काम में रफ्तार नहीं आ सकी है।
झांसी से मानिकपुर के बीच अभी सिंगल ट्रैक पर ही गाड़ियां दौड़ती हैं। सिंगल रूट होने से दो गाड़ियां एक साथ नहीं निकल पातीं। जगह-जगह गाड़ियों को रोककर दूसरी गाड़ी निकाली जाती है। इससे गाड़ियोें की रफ्तार बुरी तरह प्रभावित होती है। इसको देखते हुए झांसी-खैरार-मानिकपुर एवं खैरार-भीमसेन के 310 किलोमीटर लंबे ट्रैक का दोहरीकरण प्रस्ताव मंजूर हुआ। रेल मंत्रालय ने चार हजार करोड़ रुपये बजट भी स्वीकृत कर दिया। झांसी-मानिकपुर सेक्शन का काम पूरा करने की डेडलाइन दिसंबर 2023 तय की गई।
छह अलग-अलग भाग में यह काम कराया जाना था। शुरुआत बरुआसागर से मऊरानीपुर (42 किलोमीटर) और हरपालपुर से महोबा (52 किलोमीटर) के बीच कर दी गई। यहां बेतवा, केन और धसान नदी पर बड़े पुल बनने हैं लेकिन, करीब दो साल पहले इस खंड में शुरू हुआ काम अभी तक खत्म नहीं हुआ। अभी झांसी-महोबा के बीच दोहरीकरण का काम नहीं हो सका है।
करीब दो सौ किलोमीटर लंबे ट्रैक पर अभी शुरूआती चरण से काम आगे नहीं बढ़ सका है जबकि काम पूरा करने के लिए सिर्फ डेढ़ साल का समय बचा है। रेल अफसरों का कहना है पर्यावरण समेत अन्य एनओसी लेने में काफी समय लगा है। यहां पुल निर्माण होने की वजह से भी समय लग रहा है।
इस रास्ते गुजरती हैं एक दर्जन महत्वपूर्ण सवारी गाड़ियां
अभी झांसी-मानिकपुर सिंगल ट्रैक पर एक दर्जन प्रमुख सवारी गाड़ियां गुजरती हैं। इसी रास्ते से प्रयागराज समेत पूर्वांचल को जोड़ने वाली दूसरी गाड़ियां जाती हैं। इनमें प्रमुख रूप से यूपी संपर्क क्रांति, खजुराहो कुरुक्षेत्र एक्सप्रेस, महाकौशल एक्सप्रेस, बुंदेलखंड एक्सप्रेस, तुलसी एक्सप्रेस, चंबल एक्सप्रेस, उदयपुर-खजुराहो एक्सप्रेस, झांसी-प्रयागराज पैसेंजर, झांसी-बांदा पैसेंजर, झांसी-मानिकपुर पैसेंजर समेत अन्य गाड़ियां प्रमुख हैं।