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दोगुनी दामों पर प्याज बिकने से लोग खफा, बोले-दामों पर लगे नियंत्रण

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झांसी। मंडी में 30 रुपये और परिसर के बाहर 60 रुपये किलो प्याज बिकने से शहर के लोग खफा हैं। उनका कहना है कि हर कोई मंडी प्याज खरीदने के लिए नहीं जा सकता है। ऐसे में चंद किलोमीटर की दूरी पर प्याज के दाम दोगुने कर देना ठीक नहीं हैं। अधिकारी दावा कर रहे हैं कि प्याज की जमाखोरी नहीं हो रही है। फिर इस कदर मुनाफाखोरी आखिर क्यों हो रही है। लोगों का कहना है कि यदि ठेले वाले, फुटकर दुकानदार अपनी तरफ से दरें बढ़ाए हैं तो प्रशासन को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए। प्रशासन चुप्पी साधे है और जनता को प्याज के दाम रुला रहे हैं।
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मंडी परिसर में 30 और बाहर 60 रुपये किलो प्याज बिकना उचित नहीं है। ऐसे तो प्याज खरीदना आम जनता के बस के बाहर हो जाएगा। इस पर नियंत्रण लगना चाहिए। - रजनी व्यास, झोकनबाग।
केंद्र सरकार सस्ते दामों पर राज्य सरकार को प्याज उपलब्ध करा रही है। फिर स्थानीय स्तर पर इतनी महंगी प्याज मिलने के बावजूद प्रशासन कुछ कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा। - सीमा शर्मा, सीपरी बाजार।
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खानपान के दौरान रोजाना प्याज का उपयोग होता है। अगर इतनी महंगी प्याज मिलेगी तो आमजन खा ही नहीं पाएगा। हर कोई तो मंडी खरीदने के लिए जा नहीं सकता। - दीपा छाबड़ा, रस बहार कॉलोनी।
प्याज में इतनी ज्यादा मुनाफाखोरी हो रही है और जिम्मेदार अधिकारी मौन हैं। यह तो आम जनता के साथ खिलवाड़ है। अभियान चलाकर अधिकारियों को कार्रवाई करनी चाहिए। - रामवती देवी, शिवाजी नगर।
जिले भर में ठेले वाले, पटरी और फुटकर दुकानदार मनमानी दरों पर प्याज बेच रहे हैं। इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जनता परेशान हैं और अधिकारी चुप बैठे हैं। - प्रीति श्रीवास्तव, रायगंज।
अफसर दावा कर रहे हैं कि जिले में प्याज की जमाखोरी नहीं हो रही है। फिर इसके दाम आखिर क्यों बढ़े हैं? जनता कब तक अपनी जेब ढीली कर महंगी प्याज खरीदती रहेगी। - दिव्या अत्रे, दीनदयाल नगर।
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