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Jhansi News: तनाव को ज्यादा देर तक न टिकने दें...वर्ना दिमाग में स्थायी जगह बना लेगा

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अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। तनाव को अपने दिमाग में ज्यादा देर तक न ठहरने दें, वरना यह स्थायी रूप से अपनी जगह बना लेगा और मानसिक बीमारी में तब्दील होकर आत्महत्या के विचार पैदा करने लगेगा। खास बात यह कि मरीज को भी अपनी इस बीमारी के बारे में पता नहीं चलता। परिजनों को भी तब जानकारी होगी, जब इससे ग्रसित मरीज आत्महत्या जैसा कदम उठा लेता है। इस तरह के मामले जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की ओपीडी में आए दिन सामने आ रहे हैं।
एक महिला का अपने पड़ोस में रहने वाली दूसरी महिला से आए दिन विवाद होता था। वह सोते-जागते पड़ोसी महिला के बारे में ही सोचती रहती थी। जबकि, उसके परिवार में किसी तरह की परेशानी नहीं थी। स्थिति यह हो गई थी कि रात में भी उसके कानों में पड़ोसन की आवाज गूंजने लगती थी, जिससे वह सो नहीं पाती थी। बार-बार मरने की बात कहती थी और विक्षिप्त जैसी हो चली थी। परिवार वाले पहले झाड़-फूंक कराते रहे, लेकिन कोई आराम नहीं मिला। इस दरम्यान उसने फंदा लगाकर जान देने की कोशिश भी की, परंतु परिजनों ने उसे बचा लिया।
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इसके बाद वे लोग महिला को जिला अस्पताल में मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की ओपीडी में लेकर पहुंचे। जांच के बाद सामने आया कि महिला का तनाव गंभीर मानसिक बीमारी में तब्दील हो चुका है। महिला को पड़ोसन से कुछ समय के लिए दूर रखते हुए इलाज किया गया। तीन महीने बाद महिला पूरी तरह बीमारी से उबर गई। अब वह अपने परिवार के साथ आराम से रह रही है।
यह केवल एक महिला की बात नहीं है, बल्कि जिला अस्पताल की मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की ओपीडी में आए दिन ऐसे मरीज पहुंचते हैं। वह बात-बात पर चिड़चिड़ाते हैं और हर समय तनाव में डूबे रहते हैं। उन्हें कुछ भी अच्छा नहीं लगता और उनके मन में बार-बार जान देने का ख्याल आता है।
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मनोस्थिति में बदलाव को हल्के में न लें
जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की मनोवैज्ञानिक दीक्षा भारद्वाज ने बताया कि आपके आसपास के किसी व्यक्ति की मनोस्थिति में बदलाव को हल्के में न लें। मसलन कोई व्यक्ति जो हमेशा खुश रहता था, लेकिन अचानक उसका मिजाज बदल जाए और बात-बात पर उसे गुस्सा आने लगे, हर समय तनाव में रहने लगे, तो समझ जाएं कि वह मानसिक बीमारी की चपेट में आ गया है। उसका इलाज कराएं। नियमित इलाज से वह पहले जैसा हो जाएगा। झाड़-फूंक के चक्कर में कतई न पड़ें। इलाज से इस बीमारी का आसानी से निदान हो जाता है।
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हर परिस्थिति में खुश रखता है अध्यात्म
इस्कॉन मंदिर के बृजभूमि दास प्रभु ने कहा कि जीवन के मूल्यों और उसके उद्देश्यों को समझना चाहिए। छोटी-छोटी बातों पर तनाव नहीं लेना चाहिए। अध्यात्म से जीवन की समझ आती है। अध्यात्म मनुष्य को हर परिस्थिति में खुश रखता है। बाकी, सफलता और असफलता जीवन का अहम हिस्सा है, यह आती-जाती रहती है। इसे लेकर परेशान नहीं होना चाहिए। तनाव होने पर भगवान का स्मरण करना चाहिए। जिन बातों से तनाव हो रहा है, उसे भूल जाना चाहिए।
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