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मरीजों को बेवजह की दवाएं न लिखें डाक्टर

Sun, 23 Oct 2016 01:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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medical news jhansi - फोटो : demo
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डाक्टर को चाहिए कि वह मरीजों को बेवजह की दवाएं और जांचें न लिखें। इससे उपचार महंगा और कठिन हो जाता हैं। प्रयास करें कि अधिक से अधिक दवाएं उन्हें अस्पताल से ही मुहैया कराएं। यह बाद शनिवार को महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में आईएपीएम द्वारा आयोजित यूपीपेथकोन पैथालॉजिस्ट एवं माइक्रो बायलॉजिस्ट के दो दिवसीय सेमिनार के उद्घाटन के अवसर पर महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा प्रो. बीएन त्रिपाठी ने कही।
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प्रो. त्रिपाठी ने एक बेड पर एक या उससे अधिक मरीज होने पर कहा कि मेडिकल कॉलेज में आने वाले हर व्यक्ति को इलाज की जरूरत होती है। हम किसी को इलाज के लिए मना नहीं कर सकते है। वर्ष 2011 में प्रदेश में छह मेडिकल कालेज थे, आज 16 हैं। मेडिकल कॉलेज की सीटें भी पिछले पांच वर्षों में काफी बढ़ी हैं। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. नरेंद्र सिंह सेंगर ने बताया है कि बजट की कमी के कारण कुछ विकास कार्य रुके है। मेडिकल कॉलेज के पास बजट कम रहता है, इस कारण कई विकास कार्य लटके है। सेमिनार के दौरान यूपीपेथकोन 2016 नामक पुस्तिका का विमोचन हुआ तथा चिकित्सा से जुड़ी कई पुस्तकें और मशीनों की प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। इन मशीनों में माइक्रोस्कोप, टेलीस्कोप, सैन काउंटर आदि शामिल हैं।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने बताया कि परिसर में जल्द ही पार्क बनेगा, इसमें स्पोर्ट ग्राउंड भी होगा। पार्क का निर्माण नगर निगम करा रहा है। इसका मॉडल तालपुरा स्थित पार्क जैसा होगा। इस मौके पर डॉ. द्विजेंद्र नाथ, डॉ. प्रदीप, डॉ. राजेंद्र सिंह गलवियार, डॉ. डीएन लेंजेबार, डॉ. विजय तिलक, डॉ. नुजाता हुसैन, डॉ. वैशाली सूरी, राजेंद्र सिंह यादव आदि मौजूद रहे। संचालन डॉ. पल्लवी अग्रवाल ने किया।
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पांच जिलों में बनेंगे मेडिकल कॉलेज
महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा प्रो. बीएन त्रिपाठी ने बताया कि प्रदेश के फैजाबाद, बस्ती, बहराइच, शाहजहांपुर और फीरोजाबाद के जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज में परिवर्तन किया जाएगा। इनमें से तीन का लोकार्पण हो गया है, दो का भी जल्द लोकार्पण होगा।

अयोग्य पैथालॉजिस्ट और कमीशन के कारण होती फिर से जांच
पैथालॉजी की छोटी जांचे तो सस्ती होती है, लेकिन बड़ी जांचें महंगी होती है। डाक्टरों द्वारा बार-बार जांचें लिखने के दो ही कारण हैं। या तो पैथोलॉजिस्ट अयोग्य होगा या डॉक्टरों का पैथोलॉजिस्टों से कमीशन बंधा होगा। कभी-कभी बीमारी में सुधार आने पर भी अलग-अलग रिपोर्ट आ जाती हैं तो कभी तकनीकी कारणों से रिपोर्ट गलत आई जाती है। -डॉ हर्षमोहन, मेडिकल कॉलेज, चंडीगढ़

पश्चिमी रहन सहन के कारण आंत का कैंसर
आंत का कैंसर पश्चिमी रहन सहन व खान पान के कारण हो रहा है। यह बीमारी भारत में तेजी से फैल रही है। बुंदेलखंड के लोग अभी इस बीमारी से बचे हुए हैं। आंत का कैंसर होने पर सर्जरी करने के बाद इसकी कीमोथेरिपी और रेडियोथेरेपी करानी पड़ती है। समय पर यदि बीमारी का पता न चले तो इसका इलाज संभव नहीं है। -डॉ. राजेंद्र सिंह गलवियार
 
डा. डी नाथ बने प्रदेश अध्यक्ष
सेमिनार में मेडिकल कॉलेज पैथालॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. डी. नाथ को इंडियन एसोसिएशन ऑफ पैथालॉजिस्ट एंड माइक्रोबायोलॉजिस्ट (आईएपीएम) के यूपी चैप्टर का अध्यक्ष बनाया गया।
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