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जिला अस्पताल में मरीजों की ‘छुट्टी’

Sat, 13 Aug 2016 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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civil hospital - फोटो : amar ujala
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झांसी। बीमारियों का मौसम है। वायरल, बुखार, मलेरिया और डायरिया ने शहर को जकड़ रखा है। अब तो डेंगू का भी खतरा है, लेकिन आम आदमी के लिए सरकारी अस्पतालों में इलाज के पुख्ता इंतजाम तक नहीं हैं। शुक्रवार को हालात यह थे कि ओपीडी में 400 मरीज अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे, लेकिन उन्हें देखने के लिए एक भी फिजीशियन (विशेषज्ञ) नहीं था। अब इसे मजबूरी कहें या सिस्टम का दोष कि 10 से 80 साल तक के मरीजों का चेकअप चाइल्ड स्पेशलिस्ट कर रहे थे।

सरकारी के अलावा प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है। नि:शुल्क दवाएं मिलने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर मरीज ज्यादातर सरकारी अस्पतालों में जाते हैं, लेकिन जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों का टोटा है। शुक्रवार को जिला अस्पताल के एक फिजीशियन डॉ. डीएस गुप्ता छुट्टी पर चले गए। उनकी जगह तीन नंबर ओपीडी में चाइल्ड स्पेशलिस्ट ड़ॉ. रविकांत कुलश्रेष्ठ ने मरीजों की जांच की। चूंकि, उनकी विशेषज्ञता बच्चों में है, इसके बावजूद उन्होंने मरीजों को चिकित्सीय परामर्श दिया। इसके पीछे जिला अस्पताल प्रशासन अपनी मजबूरी बताता है।
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ओपीडी में भीड़ का आलम यह था कि दरवाजा अंदर से बंद करना पड़ा। गेट पर दो कर्मचारी तो मरीजों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तैनात करने पड़े। लाइन से पांच-पांच मरीजों को अंदर बुलाकर उनका चेकअप किया गया। सिस्टम की खामियों के कारण जिला अस्पताल फिजीशियन की कमी से जूझ रहा है। इससे सबसे ज्यादा दुर्दशा मरीजों की हो रहे हैं। न तो प्रशासन का ध्यान है, न ही शासन का। हालांकि, प्रदेश सरकार दावा करती है कि वह गांव के हर कोने तक स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कर रही है। एक रुपये के पर्चे पर इलाज हो रहा है, मगर जमीनी हकीकत में क्या है, इसकी बानगी शुक्रवार को जिला अस्पताल में देखने को मिली।

तीन पद हैं सृजित
जिला अस्पताल में फिजीशियन के तीन पद सृजित हैं। इसमें से एक डॉक्टर का करीब डेढ़ माह पूर्व तबादला हो चुका है। इसके बाद से यह पद रिक्त है। अब तक शासन स्तर से किसी भी चिकित्सक को नहीं भेजा गया है।
मरीज बोले

घंटों इंतजार के बाद आता नंबर
तबीयत बहुत खराब है। लाइन में खड़े रहना मुश्किल हो रहा है। घंटों इंतजार के बाद नंबर आता है। घबराहट होने से तबीयत और खराब हो जाती है। - रामकिशोर

एक मिनट भी नहीं देखते डॉक्टर
बहुत देर प्रतीक्षा करने के बाद जब नंबर आता है तो डॉक्टर एक मिनट भी नहीं देख पाते हैं। पूरी समस्या डॉक्टर को बताने का समय नहीं मिलता है। - सुनीता

ओपीडी में दो फिजीशियन की जरूरत
इन दिनों जिला अस्पताल में 400 से अधिक मरीज इलाज को आ रहे हैं। ऐसे में ओपीडी में कम से कम दो डॉक्टर मौजूद होना जरूरी है। ओपीडी का समय सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक होता है। ऐसे में एक डॉक्टर के पास एक मिनट का समय भी मरीज को देने के लिए नहीं होता। घंटों इंतजार के बाद मरीज डॉक्टर को सही से बीमारी के बारे में बता भी नहीं पाता है। अधूरी बात सुनकर डॉक्टर दवा लिख देते हैं, इससे मरीजों को अक्सर पुख्ता इलाज नहीं पाता है।
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शासन को भेजा है रिमाइंडर
डॉक्टरों के तबादले के बाद ही शासन को फिजीशियन की कमी होने का पत्र लिख दिया था। अभी हाल ही में फिर से रिमाइंडर भेजा है। मांग की है कि या तो डॉक्टर का तबादला रोक दिया जाए या फिर किसी अन्य चिकित्सक को भेजा जाए। जल्द ही समस्या का समाधान हो जाएगा। - डॉ. रमेश चंद्रा, सीएमएस
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