झांसी। राजकीय पॉलीटेक्निक का विवादों से पुराना नाता रहा है। मारपीट, गुंडई, गुटबाजी और शराब पीकर उत्पात मचाना तो यहां के छात्रों के लिए आम बात है। हर साल एंटी रैगिंग कमेटी के सामने 15 से 20 मामले पहुंचते रहते हैं। कई मामलों में शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत वापस ले लेने पर समझौता हो जाता है।
राजकीय पॉलीटेक्निक में झांसी के अलावा कानपुर, इलाहाबाद, लखनऊ, उन्नाव, कन्नौज, गोरखपुर, मेरठ, आगरा समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों के छात्र पढ़ने के लिए आते हैं। यहां आते ही क्षेत्रवाद के हिसाब से छात्रों के अलग-अलग गुट बन जाते हैं। छात्रों को उनके गुट का पूरा समर्थन रहता है। गुट में ही यह छात्र एक साथ बाहर निकलते हैं। हुड़दंग करना, सड़क घेरकर चलना, शराब पीकर दुकानों, चौराहों पर उत्पात मचाना, राहगीरों के साथ बेवजह उलझना, बगल से निकलने वाली छात्राओं, युवतियों पर फबत्तियां कसना आम बात है। कई बार गुटबाजी में छात्रों के बीच मारपीट की घटनाएं हो चुकी हैं। दो साल पहले हुई ऐसी ही घटना में दो छात्रों को जांच समिति ने निलंबित करने तक की सिफारिश कर दी थी। बताया गया कि कॉलेज में रैगिंग भी खूब होती है। हर साल एंटी रैगिंग कमेटी के सामने 15 से 20 मामले पहुंचते हैं। जांच के दौरान ही अधिकतर मामलों में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो जाता है। इस कारण कार्रवाई नहीं हो पाती है।
पुलिस चौकी के बगल रहता शराबियों का जमावड़ा
पॉलीटेक्निक के ठीक सामने ग्वालियर मार्ग पर पुलिस चौकी के ठीक बगल में भी शराबी युवक देर रात तक हो हल्ला, गाली गलौज करते रहते हैं। पुलिस की गाड़ी भी बगल से निकल जाती है लेकिन बेखौफ युवकों पर इसका कोई असर नहीं होता है। ऐसे में यहां से रात में लोग निकलने में असुरक्षित महसूस करते हैं।