विकास भवन में आयोजित किसान दिवस में हंगामा करते किसान।
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झांसी। विकास भवन सभागार में बुधवार को आयोजित किया गया किसान दिवस हंगामे की भेंट चढ़ गया। हंगामा होते ही समस्याएं सुनने पहुंचे अधिकारी सभागार छोड़कर भाग लिए। इस दौरान किसानों की समस्या का कोई हल नहीं हो सका। इसे लेकर किसानों ने विकास भवन के बाहर जमकर प्रदर्शन किया।
दरअसल, शासन के निर्देश पर हर बुधवार को किसान दिवस का आयोजन किया जाता है। बुधवार को विकास भवन सभागार में किसान दिवस का आयोजन किया गया था। समस्याएं सुनने के लिए जिले के तमाम विभागों के अधिकारी सभागार में पहुंचे। करीब 12 बजे शुरू हुए किसान दिवस में किसानोें ने अन्ना जानवरों, गोवंश आश्रय स्थलों में चल रहे खेल, किसान सम्मान निधि और अन्य मामलों को उठाया। इस दौरान भाकियू अराजनैतिक ने जिला उपाध्यक्ष अखिलेश लिटौरिया ने बैंकों में किसानों से ऋण देने के नाम पर की जा रही दलाली की मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बैंक में किसानों और पशुपालकों के केसीसी नहीं बनाए जा रहे हैं।
इस समस्या को लेकर किसानों ने हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे को शांत कराने के लिए एक किसान नेता खड़े हुए तो किसानों ने उनसे बहस शुरू कर दी है। किसानों ने आवाज को दबाने का आरोप लगाया। हंगामा बढ़ता देख अधिकारियों ने भागना शुरू कर दिया। किसान काफी देर तक विकास भवन सभागार में हंगामा करते रहे। जैसे ही अधिकारी निकले, तो किसानों ने विकास भवन के बाहर जमकर प्रदर्शन किया। समस्याओं का समाधान नहीं होने पर दूर-दूर से आए किसान मायूस होकर लौट गए। किसान नेता अखिलेश ने बताया कि हर बार किसान दिवस में यही होता है। किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। अविनाश भार्गव ने कहा कि गोवंश आश्रय स्थल की शिकायत करने आए थे, लेकिन हंगामा होते ही अधिकारी चले गए। किसान दिवस कभी सार्थक नहीं होता।