झांसी। शासन के आदेश की गति पुलिस विभाग में आते ही धीमी हो जाती है। हैसियत के हिसाब से गनर के देय शुल्क का निर्धारण करने संबंधी शासनादेश को डीआईजी ने एक जनवरी से लागू कर दिया है, लेकिन यह अब तक पुलिस लाइन तक नहीं पहुंच सका है। इस कारण यह आदेश अब तक जिले में प्रभावी नहीं हो सका है।
बढ़ते क्रेज को देख कर शासन ने गनर लेने के लिए आय के हिसाब से शुल्क का निर्धारण किया है, ताकि सरकार का आर्थिक बोझ कम हो सके। इस फैसले को एक जनवरी से लागू करने का भी शासन आदेश कर चुका ह,ै मगर इसे अभी तक जिले में लागू नहीं किया जा सका है। गनर लेने वालों से अभी तक आय संबंधी प्रमाण पत्र तक नहीं मांगे गए हैं। इस वजह से पूर्व की भांति शुल्क का निर्धारण किया जा रहा है।
हालांकि, इस संबंध में डीआईजी अजय मोहन शर्मा का कहना है कि गनर लेने वाले व्यक्ति को प्रतिवर्ष की आय का प्रमाण पत्र देना होगा, जिसकी जांच खुफिया विभाग से कराई जाएगी। ताकि आय प्रमाण पत्र की सत्यता के बारे में पता चल सके। इस व्यवस्था को रेंज में एक जनवरी से लागू कर दिया गया है।
वहीं, पुलिस लाइन के प्रतिसार निरीक्षक लल्लन कुमार ने बताया कि नये शासनादेश के बारे में उनको पता तो है, मगर इसे लागू नहीं किया गया है। इसकी वजह अभी तक लिखित में कोई आदेश नहीं मिलना है। आदेश मिलने के बाद नई व्यवस्था को लागू कर दिया जाएगा।
नई व्यवस्था के अनुसार पांच लाख रुपये वार्षिक आय वाले व्यक्ति को 25 फीसदी, पांच से 15 लाख रुपये की आय वाले को 50 और 15 से 25 लाख रुपये की आय वाले व्यक्ति को 75 फीसदी बेसिक वेतन का भुगतान करना होगा।