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बिजली विभाग और जेडीए की वसूली की शिकायतों से डिप्टी सीएम खफा, अफसरों को फटकारा

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झांसी। विकास भवन में जनपद के अधिकारियों की बैठक में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य बिजली विभाग और जेडीए की वसूली की शिकायतों से बेहद खफा हो गए। उन्होंने अफसरों को फटकार लगाई। कहा कि जब महायोजना अभी प्रचलित नहीं है फिर भी जेडीए द्वारा निर्माण कार्यों को ध्वस्त करने की शासन स्तर से जांच कराई जाएगी। शासन की प्राथमिकता भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की है। उन्होंने जेडीए के कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता लाने के निर्देश दिए।
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बैठक में सदर विधायक रवि शर्मा ने जेडीए की मनमानी का मुद्दा उठाया। विधायक ने कहा कि बिना नोटिस के जेडीए ने गरीबों की बाउंड्रीवाल गिराई हैं। समझ नहीं आ रहा कि जेडीए के अफसर सरकार की छवि बनाना चाह रहे हैं या बिगाड़ना। इनके पास नक्शा पास करने का तंत्र नहीं है। बिना वजह नोटिस देकर लोगों को कार्यालय बुलाया जाता है और सौदेबाजी होती है। ये सुनते ही डिप्टी सीएम ने जेडीए अफसरों से पूछा कि नगरीय क्षेत्र में अब तक ध्वस्तीकरण के लिए कितने नोटिस जारी किए हैं? बोले कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बिजली विभाग की भी इसी तरह की शिकायतें डिप्टी सीएम के सामने आईं। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि विभाग लोगों को बिल बढ़ाकर भेज रहा है। इसके बाद जब व्यक्ति विभाग में बिल संशोधन के लिए जाता है तो उससे सौदेबाजी की जाती है। इस पर केशव ने कार्रवाई के बाबत जानकारी मांगी तो अधीक्षण अभियंता ने बताया कि कुछ जेई और एई को चार्जशीट दी गई हैं। इस पर केशव नाराज हो गए और बोले सिर्फ चार्जशीट देने से काम नहीं चलेगा। बैठक में डिप्टी सीएम पेयजल योजना के धीमे काम और स्मार्ट सिटी के तहत बन रहे आतिया ताल के सौंदर्यीकरण के काम से भी नाखुश दिखे। एक महीने में आय, जाति प्रमाणपत्र बनाने के निर्देश दिए। साथ ही बैठक में अनुपस्थित अधिकारियों का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए। बैठक में डीएम रविंद्र कुमार ने डिप्टी सीएम को विकास कार्यों की जानकारी दी।
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नहीं खोली बुकलेट, विधायक, कार्यकर्ताओं से लिया था इनपुट
डिप्टी सीएम को बैठक के दौरान अफसरों की ओर से समीक्षा के लिए बुकलेट दी गई थी, जिसे उन्होंने खोला ही नहीं। अफसरों से कहा कि आपने जो बनाया होगा, अच्छा होगा। इससे पहले उप मुख्यमंत्री भाजपा कार्यालय में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद कर इनपुट ले आए थे। उन्होंने मंडल अध्यक्षों से जनता को प्रभावित करने वाली समस्याओं के बारे में पूछा था। साथ ही कोर कमेटी से भी इनपुट लिया था। इसके बाद सर्किट हाउस में विधायकों के साथ भी डिप्टी सीएम की लंबी बैठक चली। फिर उप मुख्यमंत्री खुद ही कागजों पर कई बिंदु लिखकर आए थे, जिसके आधार पर ही उन्होंने अफसरों की क्लास लगा डाली।
विधायक बोले-पेयजल योजना से छूट गए कई क्षेत्र
बैठक में गरौठा विधायक जवाहर राजपूत, बबीना विधायक राजीव सिंह पारीछा ने कहा कि पेयजल योजना से कई गांव छूट गए हैं। इन्हें शामिल किया जाए। गरौठा विधायक ने एरच बांध का निर्माण शुरू कराने की भी मांग की। सदर विधायक ने भी यही शिकायत करते हुए कहा कि अफसरों ने बैठे-बैठे योजना तैयार करके भेज दी। इस पर डिप्टी सीएम ने छूट हिस्सों को शामिल करने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजने के अफसरों को निर्देश दिए।
दो अधिशासी अधिकारियों को हटाने की उठी मांग
बैठक में भाजपा जिलाध्यक्ष जमुना कुशवाहा ने टोड़ीफतेहपुर के अधिशासी अधिकारी को हटाने की मांग की। जिलाध्यक्ष ने कहा कि पीएम आवास योजना के पात्र एक व्यक्ति को एक किस्त मिलने के बाद अधिशासी अधिकारी मकान गिरा आए। जबकि, दूसरी किस्त मिलने से उसका मकान बन सकता था। वहीं, बबीना विधायक ने कहा कि ईओ बरुआसागर की बहुत शिकायतें हैं। इसलिए इन्हें हटाया जाए।
निधि विधायकों की है, वही तय करेंगे कार्यदायी संस्था
बैठक में सदर विधायक ने पूछा कि विधायक निधि में कितना पैसा आया है। अधिकारियों ने बताया कि डेढ़ करोड़। इस पर विधायक ने कहा कि कार्यदायी संस्था कौन तय करेगा। ये सुनते ही केशव बोले कि निधि विधायक की है तो वही कार्यदायी संस्था तय करेंगे। विधायक ने उन्हें बताया कि आरईएस गुणवत्तापूर्ण काम करती है। जब वो इस आरईएस से काम कराने का प्रस्ताव देते हैं तो अफसर हटा देते हैं। इस पर केशव बोले कि अफसर ऐसा न करें।
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