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दीपों की रोशनी से जगमग होगा महालक्ष्मी मंदिर

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झांसी स्थित लक्ष्मी मंदिर।
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दीपों की रोशनी से जगमग होगा महालक्ष्मी मंदिर
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झांसी। प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर में दीपावली पर विशेष पूजा - आराधना होगी। इसकी तैयारियां शुरू कर दीं गईं हैं। मंदिर परिसर को दीपों से सजाया जाएगा। इसके लिए पुरातत्व विभाग सामाजिक संस्थाओं का सहयोग लेगा।
लक्ष्मी तालाब के तट पर महालक्ष्मी मंदिर स्थित है। इसका निर्माण झांसी के मराठा सूबेदार रघुनाथ राव नेवालकर द्वितीय ने 17वीं शताब्दी में कराया था। ये मंदिर देश में स्थित महालक्ष्मी के प्रमुख मंदिरों में से एक माना जाता है। मंदिर राज्य पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। पुरातत्व विभाग द्वारा मंदिर में कई कार्य भी कराए गए है। पर्यटकों का भी यहां आना जाना लगा रहता है। साथ ही रोजाना श्रद्धालु भी पहुंचते हैं।
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इस बार दीपावली पर मंदिर में अनूठा आयोजन किया जाएगा। मंदिर में बिजली की झालरों का कम प्रयोग कर पारंपरिक ढंग से जगह-जगह दीपक जलाकर इसे रोशन किया जाएगा। इसके जरिये ऊर्जा संरक्षण का संदेश दिया जाएगा। इस संबंध में प्रभारी क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे ने बताया कि आयोजन की तैयारियां शुरू कर दीं गईं हैं। इस काम में सामाजिक संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा। ऐतिहासिक इमारत में दीपावली का त्योहार अनूठे अंदाज में मनाया जाएगा।
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रानी लक्ष्मीबाई संभालती थीं प्रबंधन
वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई को इस मंदिर से खासा लगाव था। रानी प्रतिदिन यहां दर्शन करने तो जाती ही थीं, साथ ही मंदिर का प्रबंध भी वे खुद संभालती थीं। सन 1857 में अंग्रेजों ने मंदिर की संपत्ति को कब्जे में ले लिया था। इससे लोगों में भारी आक्रोश था। माना जाता है कि अंग्रेजों के खिलाफ हुए विद्रोह की एक बड़ी वजह ये भी थी।
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