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आसानी से नहीं मिलेगा फसल बीमा से छुटकारा

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आसानी से नहीं मिलेगा फसल बीमा से छुटकारा बैंकों में लिखित तौर पर देना होगा आवेदन खरीफ बीमा की खातिर दो फीसदी कटती है रकम झांसी। केंद्र सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना को भले अब ऐच्छिक कर दिया हो लेकिन, किसानों को इससे आसानी से छुटकारा नहीं मिलेगा। बीमा योजना से अलग होने के लिए उनको बैंकों में जाकर लिखित आवेदन करना होगा। मंजूरी मिलने के बाद ही उनका प्रीमियम नहीं कटेगा जबकि आवेदन न करने वाले किसानों का हर बार की तरह ही प्रीमियम काटा जाएगा। फसलों को कुदरती कहर से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2016 में फसल बीमा योजना आरंभ की। केसीसी धारक किसान का प्रीमियम बैंक खुद काट लेते थे। इसका किसान संगठन जर्बदस्त विरोध कर रहे थे। किसानों के असंतोष को देखते हुए सरकार ने खरीफ सीजन से इस योजना को ऐच्छिक कर दिया लेकिन, अब जब बीमा का रजिस्ट्रेशन आरंभ हुआ तब यह बात सामने आ रही कि उन्हीं किसानों को छूट दी जाएगी जो 31 जुलाई तक बैंकों में आवेदन करेंगे। आवेदन करने में असफल किसानों के खाते से रकम खुद-ब-खुद कट जाएगी। बता दें, योजना के तहत किसानों को खरीफ फसल के लिए दो फीसदी, रबी की फसल के लिए 1.5 फीसदी जबकि बागवानी के लिए पांच फीसद तक प्रीमियम के तौर पर चुकाना होता है। शेष रकम केंद्र एवं राज्य सरकार वहन करती है। जिला कृषि अधिकारी कमलेश कुमार सिंह के मुताबिक सभी गांव में इसकी सूचना प्रसारित कराई जा रही है। किसानों को बैंक जाकर ही आवेदन देना होगा। इनसेट पिछली दफे किसानों को हुआ था फायदा बीमा कंपनियों पर भले हेरफेर के आरोप लगते हों लेकिन, पिछली खरीफ सीजन में बीमा कराने की वजह से ही किसानों को नुकसान से काफी राहत मिली थी। पिछली खरीफ सीजन के दौरान सितंबर-अक्तूबर माह में जबर्दस्त बारिश की वजह से दलहनी फसल पूरी तरह चौपट हो गई। किसानों के हाथ उपज का दस फीसद भी नहीं आया लेकिन बाद में बीमा से उनकी काफी हद तक क्षतिपूर्ति हो गई। बीमा कंपनी ने किसानों के बीच करीब 210 करोड़ रुपए बीमा के तौर पर बांटे थे।
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