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आत्मनिर्भर भारत अभियान से जुड़ेंगी ग्रामीण महिलाएं

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आत्मनिर्भर भारत अभियान से जुड़ेंगी ग्रामीण महिलाएं 4416 स्वयं सहायता के जरिए 45 हजार महिलाओं को मिलेगी मदद   झांसी। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत ग्रामीण महिलाओं को अपने पांव में खड़े होने में मदद की जाएगी। ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत इन महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के जरिए बेहद कम दरों में ऋण उपलब्ध कराया जा रहा। इसकी मदद से यह महिलाएं गांव में ही अपना खुद का रोजगार विकसित कर सकेंगी। इससे करीब 45 हजार महिलाओं को मदद मिलने की उम्मीद है। कोविड-19 के प्रकोप ने नई परिस्थितियां पैदा कर दीं। सरकार अब आत्मनिर्भर भारत अभियान के जरिए ग्रामीण इलाकों में रोजगार बढ़ाना चाहती है। ग्रामीण महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए स्वयं सहायता समूहों की मदद ली जा रही। झांसी में 4416 स्वयं सहायता समूह हैं जिनसे 45 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। प्रत्येक स्वयं सहायता समूह को रिवाल्विंग फंड के जरिए सवा लाख रुपये दिए जा रहे हैं। यह समूह 12 फीसदी ब्याज पर पैसे अपने सदस्यों को देंगी। इन पैसों से महिलाएं सिलाई मशीन, दोना-पत्तल कारखाना, अगरबत्ती मशीन आदि स्थापित कर सकती हैं। ब्याज के पैसे भी समूह के पास रहेंगे जिसे समूह के दूसरे सदस्यों के मदद में खर्च किया जाएगा। ग्रामीण आजीविका मिशन अधिकारियों के मुताबिक जिन समूहों का लेन-देन बेहतरीन होगा, वह सीधे बैंक से पांच-दस लाख रुपये तक का लोना भी हासिल कर सकेंगे। इसके लिए स्वयं सहायता समूह की बैंक गांरटी से ही काम चल जाएगा। इस पैसे से गांव में ही बड़ा उद्योग भी स्थापित किया जा सकेगा। 0000 ग्रामीण महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए ब्याज दर भी कम की गई है। कोशिश की जा रही कि अधिक से अधिक स्वयं सहायता समूह की महिलाएं इसका लाभ उठा सकें। डा.नागेंद्र नारायण मिश्रा
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