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महानगर के नर्सिंगहोम में डेंगू और बुखार के मरीजों की भरमार, संख्या 5000 के पार

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झांसी। जिले भर में डेंगू ने जमकर कहर बरपाया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक महज 226 डेंगू के मरीज हैं, जबकि हकीकत इससे विपरीत है। जिले के निजी अस्पतालों में डेंगू के मरीजों की भरमार है। निजी अस्पताल संचालकों और चिकित्सकों के अनुसार अब तक 5000 से अधिक लोगों में डेंगू के लक्षण पाया गया है। जिनको अस्पतालों में भर्ती कर इलाज किया गया है। हालांकि अधिकतर स्वस्थ हो गए हैं जबकि, कइयों का अभी तक इलाज किया जा रहा है।
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वर्तमान में जिले भर में 250 से अधिक निजी अस्पताल और नर्सिंग होम संचालित किए जा रहे हैं। इन अस्पतालों में वायरल फीवर के साथ ही डेंगू के मरीजों की भरमार है। पड़ताल के अनुसार शहर के छोटे अस्पतालों में अब तक तीस से अधिक डेंगू के मरीजों का इलाज किया जा चुका है। जबकि बड़े अस्पतालों और नर्सिंग होम में पचास से अधिक डेंगू के मरीज भर्ती हो चुके हैं। जिनमें से अधिकतर मरीज इलाज के दौरान स्वास्थ्य हो गए हैं। जबकि वर्तमान में अभी भी एक हजार से अधिक मरीजों का इलाज किया जा रहा है। चिरंजीवी अस्पताल के चिकित्सक डॉ. संजय त्रिपाठी ने बताया कि अस्पताल में अब तक डेंगू के 17 मरीजों का इलाज किया गया है। इलाज के दौरान सभी स्वस्थ हो गए हैं। सिर्फ एक ही मरीज भर्ती है। मेट्रो अस्पताल के संचालक डॉ. वीर सिंह के अनुसार रोजाना 4 से 5 डेंगू के मरीज आ रहे हैं। अब तक 40 मरीज अस्पताल में भर्ती हुए हैं। इलाज के दौरान सभी ठीक हो गए हैं। वर्तमान में सिर्फ चार मरीजों का इलाज किया जा रहा है। विनायक अस्पताल के चिकित्सक डॉ. सतीश अग्रवाल ने बताया कि अस्पताल में संभावित डेंगू के अब तक 25 मरीजों का इलाज किया जा चुका है। अस्पताल में सिर्फ चार ही मरीज हैं। बचपन चिल्ड्रेन अस्पताल के संचालक डॉ. प्रशांत दीक्षित ने बताया कि डेंगू से ग्रसित होकर अब तक 20 बच्चों को अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती किया गया है। अधिकतर बच्चे बीमारी से उभर गए हैं। सिर्फ चार ही बच्चों का इलाज किया जा रहा है।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि निजी अस्पतालाें द्वारा स्ट्रिप से जांच की जाती है। जबकि डेंगू की जांच के मेडिकल कॉलेज में एलाइजा टेस्ट की सुविधा ही वैधानिक है। मेडिकल कॉलेज में डेंगू की पुष्टि के लिए शहर के कई बडे़ अस्पताल संचालकों को पत्र लिखा गया है।
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