झांसी। जिले में डेंगू का दायरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक सरकारी रिकॉर्ड में 22 मरीज डेंगू की चपेट में आ चुके हैं। जबकि, निजी अस्पतालों में आंकड़ा तो इससे ज्यादा है। चूंकि, नर्सिंगहोमों में एंटीजन किट से जांच होती है, ऐसे में इसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद भी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया जाता है।
डेंगू के सबसे ज्यादा 288 मरीज वर्ष 2018 में मिले थे। इसके बाद 2019 में मरीजों की संख्या घटकर 63 ही रह गई। इस साल कोरोना वायरस के चलते जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में ज्यादातर कोविड मरीजों के उपचार पर ही फोकस रहा। ऐसे में डेंगू के लक्षण वाले मरीज सरकारी के बजाए ज्यादातर निजी अस्पताल में उपचार कराने जा रहे हैं। वहां पर एंटीजन किट से जांच होती है, जिसकी रिपोर्ट को सरकारी रिकॉर्ड में नहीं लिया जाता है। इसलिए अब तक एलाइजा टेस्ट में 22 डेंगू के मरीज सामने आए हैं। जिला मलेरिया अधिकारी आरके गुप्ता का कहना है कि इस बार डेंगू के लिए प्रभावी रणनीति बनाकर काम किया गया। संवेदनशील क्षेत्रों में अच्छी तरह छिड़काव कराने की वजह से केस कम हुए हैं।
ये हैं लक्षण
- डेंगू के लक्षण तीन से 14 दिन बाद दिखते हैं।
- तेज बुखार के साथ शरीर के उभरे चकत्तों से खून रिसता है।
- पेट खराब, कमजोरी, दस्त, चक्कर, भूख न लगने की समस्या होती है।
- जब रोगी का तापक्रम सामान्य नहीं होता, तब रक्त में प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं।
ऐसे करें बचाव
- मच्छरों और लार्वा को खत्म कर दें।
- सोते समय कपड़े ओढ़कर सोएं।
- घर के आसपास गड्ढों, पानी के एकत्र होने वाले स्थानों को पाट दें।
- छत की टंकी, टैंक, कूलर आदि का पानी सप्ताह में एक बार जरूर बदलें।
- मच्छर पैदा होने वाले स्थानों पर कीटनाशक का छिड़काव करें।
ये हैं संवेदनशील क्षेत्र
- नगरा, हंसारी, नई बस्ती, तालपुरा, खुशीपुरा, गुमनावारा, वीरांगना नगर, करगुवां, संगम विहार व शिवाजी नगर।