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भीषण गर्मी में बढ़ी बिजली की मांग, मगर ओवरलोडिंग से नहीं कट रही बिजली

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हंसारी औरा दुनारा ट्रांसमिशन सबस्टेशनों के बीच लोड बंटने से इस भीषण गर्मी में भी ओवर लोडिंग की समस्या का सामना नहीं करना पड़ रहा है। महानगर में 20 मेगावाट बिजली की मांग बढ़ने के बाद भी ट्रांसमिशन सबस्टेशन सामान्य दिनों की तरह चल रहे हैं। हंसारी की क्षमता 163 मेगावाट की है और मांग 110 मेगावाट की चल रही है। इसी तरह, दुनारा की क्षमता 80 मेगावाट की है और मांग 50 मेगावाट की चल रही है। अभी बुंदेलखंड के शहरी क्षेत्रों को 24 और ग्रामीण क्षेत्रों को 20 घंटे बिजली देने का रोस्टर चल रहा है। महानगर में हंसारी ट्रांसमिशन सबस्टेशन पर लगे उच्च क्षमता 63 एमवीए (मेगावाट) के दो और 40 एमवीए के एक ट्रांसफार्मर से जेल चौराहा, हाइडिल, रानीमहल, मुन्नालाल, पुलिया नंबर नौ, प्रेमनगर, नंदनपुरा, खालसा सीपरी बाजार, गल्ला मंडी, बिजौली, ग्रोथ सेंटर और बरुआसागर को बिजली दी जा रही है। मेडिकल, पंचवटी उन्नाव गेट, गल्लामंडी, न्यू गल्लामंडी और सूतीमिल सबस्टेशन को बड़ागांव स्थित दुनारा ट्रांसमिशन सबस्टेशन से बिजली मिलती है। महानगर की बिजली दो ट्रांसमिशन सबस्टेशनों में बंटने से ओवरलोडिंग की समस्या उत्पन्न नहीं हो रही है। भीषण गर्मी में भी हंसारी ट्रांसमिशन सबस्टेशन पर 110 मेगावाट की मांग है और दुनारा पर 50 मेगावाट की मांग चल रही है। वहीं, दो साल पहले तक महानगर में सामान्य दिनों में 140 मेगावाट बिजली की मांग रहती थी और इन दिनों यह मांग बढ़कर 160 से 170 तक पहुंच जाती थी। हंसारी पर लोड बढ़ने पर अलग-अलग समय बारी-बारी से सबस्टेशनों की बिजली एक-एक घंटे के लिए काटनी पड़ती थी, लेकिन ऐसी स्थिति नहीं बन रही है। इतना जरूर है कि ट्रांसफार्मरों को ट्रिपिंग से बचाने के लिए ट्रांसमिशन अफसर और कर्मचारी इन पर निगाह बनाए हुए हैं। ये आया अंतर ----------- सबस्टेशन का नाम सामान्य दिनों में इन दिनों हंसारी (झांसी) 100 मेगावाट 105 से 110 मेगावाट दुनारा (बड़ागांव) 40 मेगावाट 45 से 50 मेगावाट मोंठ 60 मेगावाट 70 से 80 मेगावाट गुरसराय 40 मेगावाट 47 से 55 मेगावाट मऊरानीपुर 40 मेगावाट 48 से 55 मेगावाट ओवर लोडिंग दिक्कत नहीं है। दुनारा से गल्लामंडी, उन्नाव गेट, सूतीमिल, मेडिकल सबस्टेशन के जुड़ने से हंसारी पर ओवर लोडिंग की समस्या दूर हो गई है। हालांकि, उपभोक्ताओं से आग्रह है कि वे जरूरत के हिसाब से ही बिजली खर्च करें, ताकि ट्रांसफार्मरों को कोई नुकसान नहीं पहुंच सके। - विनोद जायसवाल, अधिशासी अभियंता (ट्रांसमिशन)।
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