झांसी। यदि शुगर का स्तर बढ़ा रहता है या ब्लड प्रेशर, दिल का रोग है तो नियमित दवा लें। अन्यथा लकवा का शिकार हो सकते हैं। हृदय रोगियों की तरह लकवा होने पर तुरंत उपचार की जरूरत होती है। इसकी वजह हर सेकेंड में दिमाग की 32000 कोशिकाएं नष्ट होती हैं। उपचार में देरी होने पर स्थायी विकलांगता या मृत्यु तक हो जाती है।
मेडिकल कॉलेज के न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ. अर्पित अग्रवाल ने बताया कि जिन लोगों का शुगर लेवल बढ़ा रहता है उनके दिमाग की नसों में सूजन आ जाती है। इससे नसों में रक्त का प्रभाव ठीक नहीं रहता। ब्लड प्रेशर की दिक्कत होने से दिमाग की नसों में ब्लॉकेज अथवा फटने की आशंका बढ़ जाती है। जिन लोगों का शुगर लेवल ज्यादा रहता है और दिल की भी दिक्कत है, उनमें लकवा होने की ज्यादा आशंका होती है। इन रोगियों में ठंड के मौसम में नसों के सिकुड़ने से लकवा होने का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि लकवा होने से ज्यादा खतरनाक होता है रोगी को समय से उपचार न मिलना। जिन लोगों को कुछ समय के अंदर ही उपचार मिल जाता है उनके प्रभावित अंग से फिर से सक्रिय होने की उम्मीद काफी बढ़ जाती है। जैसे-जैसे समय निकलता जाता है, वैसे-वैसे उम्मीद कम होने के साथ रोगी की जान खतरे में पड़ जाती है।
न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कनकने ने बताया कि अब युवा भी लकवा की चपेट में आ रहे हैं। इसकी मुख्य वजह बदलती जीवनशैली, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति, शुगर, ब्लड प्रेशर, वसा युक्त भोजन है। जागरुकता के अभाव में लोग समय पर उपचार नहीं कराते, जिसका दंश रोगी को जिंदगीभर झेलना पड़ता है।
लकवा की पुष्टि के लिए खुद करें स्क्रीनिंग
चिकित्सकों का कहना है कि लकवा की पुष्टि के लिए एफएएसटी (फस्ट) स्क्रीनिंग करें। एफ यानी चेहरे की आकृति देखें, ए यानी हाथ की चाल देखें, एस यानी आवाज देखें। इनमें बदलाव महसूस होने पर टी यानी 4.30 घंटे के अंदर उपचार शुरू करवाएं ताकि अंग ज्यादा प्रभावित न हो।
ये हैं लकवा के लक्षण
हाथ-पैरों में कमजोरी या सुन्नता, चेहरे का तिरछापन, बोलने व समझने में परेशानी, चलने में लड़खड़ाहट, देखने में तकलीफ, व्यवहार में बदलाव, सिरदर्द, चक्कर या उल्टी आना।
बचाव के उपाय
संतुलित आहार एवं कम वसायुक्त भोजन लें
नियमित 40-45 मिनट पैदल चलें
संघर्षपूर्ण जीवनशैली में बदलाव करें
शुगर और बीपी नियंत्रित रखें