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झांसी वर्कशाप में नहीं बनेंगे ‘दीनदयालु कोच’

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deendayalu coach will not make in jhansi
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झांसी वर्कशाप में नहीं बनेंगे ‘दीनदयालु कोच’
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झांसी। कोच मरम्मत कारखाने में अब ‘दीनदयालु कोच’ भी तैयार नहीं होंगे। रेलवे बोर्ड ने इस योजना को स्थगित कर दिया है। अभी तक ये कोच चेन्नई और कपूरथला कोच फैक्टरी में तैयार हो रहे हैं।
रेल बोर्ड ने जनरल कोचों में यात्रा की गुणवत्ता सुधारने के लिए आधुनिक अनारक्षित कोच ‘दीनदयालु’ बनाने की योजना चालू की थी। इन कोचों में मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट, डस्टबिन, सामान रखने के लिए अधिक जगह व एक्वागार्ड (प्यूरीफाई मशीन) जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही थीं। इनमें एलईडी लाइटें और आग बुझाने के उपकरण भी उपलब्ध हैं। शुरुआत में इन कोचों को उन मार्गों पर इस्तेमाल किया गया, जहां जनरल कोचों में सीटों के लिए भारी मांग है। इन कोचों में गद्देदार सीट व कोट हुक लगाए गए।
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रेलवे बोर्ड ने झांसी कोच मरम्मत कारखाने में भी ‘दीनदयालु कोच’ बनाने के निर्देश दिए थे। वर्कशाप अधिकारियों ने कुछ ठेकेदारों को बुलाकर इस सिस्टम को लगाने के लिए वार्ता भी थी, लेकिन बोर्ड ने अब इस योजना को स्थगित कर दिया है।
रेलवे बोर्ड ने इस योजना को स्थगित कर दिया है। यह योजना पुरानी पद्धति के एलएचबी कोचों में लागू होनी थी, लेकिन इनका प्रयोग लगातार कम होता जा रहा है। अब आईसीएफ कोचों का ही निर्माण हो रहा है। इस कारण ये रोक लगा दी गई।
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एसपी तिवारी, मुख्य कारखाना प्रबंधक एमएलआर वर्कशॉप।
कोचों में अभी ये चल रहे बदलाव
- बायोटॉयलेट लगाए जा रहे हैं। उद्देश्य है कि स्टेशन व पटरियों से गंदगी को हटाया जा सके।
- अभी तक रेलवे जनरल व स्लीपर कोच में दरवाजे के निकट मोबाइल चार्ज करने के लिए दो प्वाइंट उपलब्ध कराता था, मगर अब मरम्मत होकर नए बनाए जा रहे सभी कोचों में 18-18 मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट लगाए जा रहे हैं।
- नए कोचों में अग्निरोधक सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे आग लगने की स्थिति में एकदम आग नहीं भड़क सकेगी। बर्थ धीरे-धीरे सुलगेगी।
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