अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। दो बेटियों के संघर्ष ने आखिरकार उनकी मां के हत्यारों को सजा तक पहुंचा दिया। 11 साल पुराने संपत्ति विवाद में महिला की गोली मारकर हत्या किए जाने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश नेयाज अहमद अंसारी ने तीन अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास समेत जुर्माने की सजा सुनाई। अभियुक्तों को सजा दिलाने में महिला की नौ साल की बेटी की चश्मदीद गवाही समेत बड़ी बेटी की ओर से दर्ज कराई गई दूसरी एफआईआर सबसे अहम साबित हुई। कोर्ट ने हत्या के आरोप में महिला के पति समेत दो सौतेले बेटों को सजा सुनाई, जबकि एक को बरी कर दिया।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, झरना गेट निवासी सुदामा यादव की शादी विशना देवी से हुई थी। उनके 4 बेटे पप्पू उर्फ पदवेंद्र, अखिलेश, निहाल और ऐलान हैं। कुछ साल बाद सुदामा ने शिवा (47) नाम की महिला से दूसरी शादी रचा ली। शिवा भी पहले से शादीशुदा थी। उसकी एक बेटी संयोगिता और बेटा संजय है। सुदामा से भी शिवा को एक बेटी और एक बेटा हुआ। शिवा के नाम झरना गेट पर करोड़ों रुपये की दो बीघा जमीन थी। विशना के बेटे जमीन हड़पना चाहते थे। संपत्ति को लेकर उनके बीच विवाद होता था। शिवा झरना गेट स्थित शनिदेव मंदिर के दुकान चलाती थी।
4 जनवरी 2014 को शिवा अपनी 9 साल की बेटी, 11 साल के बेटे के साथ दुकान पर थी। शाम करीब 7:45 बजे बाइक से सौतेले बेटे पदवेंद्र उर्फ पप्पू और ऐलान पहुंचे। पप्पू ने तमंचे से शिवा को गोली मार दी। घटना से कुछ मिनट पहले ही सुदामा दुकान से निकला था। शोर सुनकर वह लौटा। मेडिकल कॉलेज ले जाने पर शिवा की मौत हो गई। पुलिस को गुमराह करने के लिए सुदामा ने कोतवाली में पदवेंद्र और निहाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। दो दिन बाद शिवा की बेटी संयोगिता ने तत्कालीन एसएसपी को बताया कि उसकी छोटी बहन ने पूरी घटना देखी है। उसी ने बताया कि बाइक से पदवेंद्र और ऐलान आए। पदवेंद्र ने ही मां को गोली मारी है। हत्या में सौतेले पिता सुदामा भी शामिल हैं। संयोगिता की पैरवी पर पुलिस ने सुदामा, पदवेंद्र, ऐलान और निहाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करके उनको गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
बच्ची इस मामले में चश्मदीद गवाह थी। कोर्ट ने उसकी गवाही को विश्वसनीय माना। संयोगिता समेत अन्य गवाहों ने भी गवाही दी। तमाम सबूतों के आधार पर कोर्ट ने पति सुदामा, सौतले बेटे पदवेंद्र उर्फ पप्पू और ऐलान को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, निहाल को बरी कर दिया। तीनों पर तीनों पर 3.15 लाख रुपए अर्थदंड लगाया गया।