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बेटियां शिक्षित तो पीढ़ियां शिक्षित

Tue, 14 Jul 2015 12:31 AM IST
झांसी / ब्यूरो
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सोमवार को अमर उजाला क ा ‘बेटी ही बचाएगी’ अभियान के तहत बेसिक शिक्षा विभाग के सहयोग से घर-घर जाकर मौके पर विद्यालयीय शिक्षा से वंचित चार बच्चों का प्रवेश कराया गया। मंगलवार को प्राथमिक विद्यालय डीसी तालपुरा, नवीन ओरछा गेट से सुबह नौ बजे से अभियान चलेगा।
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बंगलाघाट स्थित प्राथमिक विद्यालय बड़ागांव गेट बालक, प्राथमिक विद्यालय बड़ागांव गेट कन्या से जूनियर हाईस्कूल सागर गेट, प्राथमिक विद्यालय सागर गेट, प्राथमिक विद्यालय लक्ष्मीगेट के स्कूली बच्चों ने हाथों में बैनर, तख्तियां लेकर क्षेत्र में रैली निकाली। इस दौरान शिक्षाप्रद नारे लगाए और लोगों कोे शिक्षा के प्रति जागरूक किया। वहीं नगर खंड शिक्षा अधिकारी राजकुमार विश्वकर्मा, एबीआरसी चौधरी धर्मेंद्र, शिक्षक दीपचंद्र, सूरज वर्मा, मनोज शाक्या, शोभाराय, हेमा करंदीकर, पुष्पेंद्र सिंह, प्रमोद गुप्ता, सोनिया अग्रवाल, शकु ंतला देवी, ललित तिवारी, ममता तिवारी, शोभा साहू, वंदना साहू, विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष संजय कुमार, राजीव, आशाराम, सदस्यों में महादेवी, रमादेवी, प्रेमवती आदि ने बुलावा टोलियों के माध्यम से अमर उजाला टीम के साथ बेटी ही बचाएगी अभियान, नामांकन पखवाड़ा व प्रवेश उत्सव के तहत लक्ष्मीगेट, बड़ागांव गेट, गडरयाना, बंगलाघाट, चतुरयाना, गोपाल की बगिया आदि क्षेत्रों में घर-घर जाकर बेटियों की शिक्षा के प्रति लोगों को जागरूक किया और विद्यालयीय शिक्षा से वंचित चार बच्चों दुर्गा, खुशनुमा, कुलदीप, अर्जुन का ऑन स्पॉट प्रवेश कराया।
बेटी ही बचाएगी अभियान के तहत ही राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल लक्ष्मीगेट की छात्राओं व शिक्षिकाओं में विट्ठन शर्मा, ऊषा अग्निहोत्री, प्रभा त्रिपाठी, तुलसादेवी वर्मा ने क्षेत्र में रैली निकाल कर ऑन स्पॉट प्रवेश कराया।  इस दौरान कई अभिभावकों को बेटियों की शिक्षा देने की महत्ता बताई एवं उन्हें संकल्प दिलाया।  
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बेटियों की शिक्षा में बाधा बन रही आर्थिक तंगी
कहीं मजबूरी तो, कहीं गरीबी, बेटियों की शिक्षा में अवरोधक बन रही है। अभिभावक तो चाहते हैं, कि उनकी बेटी तालीम हासिल करे, लेकिन क्या करें तंगहाली जवाब दे जाती है। बड़ागांव गेट निवासी खुशबू ने कक्षा नौ के बाद पढ़ाई से छोड़ दी। मां आशा के मुताबिक स्कूलों में फीस ज्यादा मांगते हैं, वहीं वजीफा भी नहीं मिलता तथा कोई सरकारी मदद भी नहीं है। ऐसे में उनके बच्चों का पढ़ाई से स्वत: नाता टूट गया। हालांकि खुशबू के भाई ने संकल्प लिया कि वह अपनी बहन को आगे जरूर पढ़ाएंगे। बड़ागांव गेट के समीप एक निर्माणाधीन मकान में मजदूरी कर बहन के बच्चों को दुलार रही दुर्गा ने बताया कि घरेलू काम के चलते पढ़ाई नहीं कर पाती है। हालांकि इस मौके पर उसकी बहन ने शिक्षा की महत्ता जानकर उसका मौके पर एडमीशन कराया।
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