झांसी। तारीख पर तारीख और हर तारीख पर खर्च, लेकिन शशांक जैन के 65 वर्षीय पिता फूलचंद जैन अपने बेटे का हौसला बढ़ाते रहे, हार नहीं मानी और मुकदमा जीत कर बता दिया कि जीत तो सच्चाई की ही होती है। उन्होंने तय कर लिया था कि जिस बिजली विभाग ने उन्हें और उनके बेटे को परेशान करके रख दिया, उसके सिस्टम को बेनकाब करना है और ऐसा करके दिखा भी दिया। अपनी इस जंग पर वे सिर्फ इतना ही बोले- सत्यमेव जयते।
बात कोई दस साल पहले की है। मेडिकल कॉलेज इलाके के मयूर विहार कालोनी कालोनी(कानपुर रोड) निवासी में फूल चंद्र जैन के बेटे ने शशांक जैन ने साइबर कैफे खोला और बिजली कनेक्शन लिया था। लेकिन बिल शशांक जैन के बजाय अशोक जैन नाम से आया तो उन्होंने इसके संशोधन के लिए अर्जी दी।
साथ ही कहा कि वे अब संशोधन के बाद ही बिल का भुगतान करेंगे। बिजली विभाग ने बकाए पर कनेक्शन काट दिया। बेटे से जिला उपभोक्ता फोरम में याचिका करवाई लेकिन इस बीच नाम संशोधित कर दिया गया। तब उन्होंने अपने बेटे की तरफ से हर्जाने का मुकदमा राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत तक लड़ा और जीत भी गए।
वर्ष 2007 से 08 तक झांसी उपभोक्ता फोरम में 25, राज्य उपभोक्ता फोरम में 30 और राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम में छह तारीखों पर सुनवाई हुई और बीते सोमवार 5 सितंबर को फैसला आया। मेडिकल विभाग से रिटायर अधिकारी फूलचंद ने बताया कि इस दौरान अदालत तक आनेजाने और पैरवी में हजारों रुपये खर्च हो गए। मानसिक और शारीरिक परेशानी भी हुई।
राज्य उपभोक्ता फोरम में हारने के बाद उन्होंने खुद कानून की किताबें पढ़ीं और बारीकियां सीखने के बाद राष्ट्रीय लोक अदालत में खुद पैरवी की। इसका नतीजा आया तो सुकून मिला। बात हर्जाना वसूलने की नहीं, उसूल और सरकारी सिस्टम को बेनकाब करने की है और उसमें हम सफल रहे।