अब महानगर के मुस्लिम समुदाय के लोग आपसी विवादों को दारूल कजा (शरई अदालत) के कार्यालय में निपटा सकेंगे। इसके लिए जीवनशाह मजार के पास ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की देखरेख में कार्यालय बन रहा है। कमेटी का गठन भी किया गया है। बृहस्पतविार को मदरसा माहदुल मआरिफ जामा मस्जिद शहीदैन में बोर्ड के पदाधिकारियों ने बैठक में यह जानकारी दी।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड दारूल कजा कमेटी के कन्वीनर अतीक अहमद कासमी वस्तवी ने बताया कि बोर्ड उत्तर प्रदेश के हर जिले में दारूल कजा कमेटियां बना रहा है। इससे अदालतों पर मुकदमों के बढ़ते बोझ को कम करने में मदद मिलेगी। वहीं, मुस्लिम समुदाय के लोग आपसी झगड़े सुलह-समझौते से निपटा सकेंगे। बिहार, उड़ीसा, झारखंड, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में 52 दारूल कजा कमेटियां बनाई जा चुकी हैं। इसी के मद्देनजर बोर्ड की निगरानी में महानगर में भी दारूल कजा कमेटी का गठन किया गया है। इसका कार्यालय जीवन शाह मजार के पास बनाया जा रहा है। इसके संचालन के लिए मुफ्ती सिद्दीक नदवी को काजी की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने बताया कि सभी धर्म समुदाय के लोग आपस के झगडे़ अपने तरीके से हल करें और मुल्क क ो खुशहाल करने का लक्ष्य बनाएं।
अंजार आलम कासमी ने निकाह, तलाक समेत कई बिंदुओं पर रोशनी डालते हुए दारूल कजा का महत्व बताया। अन्य वक्ताओं ने लोगों को बुराईयों से दूर रहने की अपील की। जामिया अरबिया हथौरा बांदा के मौलाना मुफ्ती उबैदुल्लाह असदी, बोर्ड के आर्गनाइजर मुफ्ती तबरेज आलम कासमी, मौलाना सुहैब हुसैनी नदवी ने भी दारूल कजा पर अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर डॉ. इकबाल सिद्दीकी, सुल्तान अहमद खान, हाजी नासिर, नूर अहमद मंसूरी, सैयद शाने हैदर जैदी, परवेज, नईम खान मौलाना सैय्यद मोहम्मद कामिल, गुलाम रसूल, मजहर अली आदि मौजूद रहे। संचालन मुफ्ती इमरान नदवी ने किया और आभार मुफ्ती अफ्फान असदी ने जताया।