झांसी/ललितपुर। बुंदेलखंड का ललितपुर पुरातत्व संपदाओं की खान है। संरक्षण के अभाव में इन पुरातत्व संपदाओं का अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है। ललितपुर के ही बिरधा ब्लॉक में स्थित चांदपुर जहाजपुर के जैन मंदिरों का अस्तित्व खतरे में हैं। यहां 10वीं शताब्दी के मंदिर में भगवान शांतिनाथ की 29 फुट ऊंची मूर्ति भक्तों को शांति का अनुभव कराती है।
बिरधा ब्लॉक में धौर्रा रेलवे स्टेशन से चार किमी दूर स्थित चांदपुर जहाजपुर को रेलवे ट्रैक दो भागों में बांटता है। यहां पर रेलवे ट्रैक के एक ओर चांदपुर है, तो दूसरी ओर जहाजपुर है। यहां पर 10वीं शताब्दी का पत्थर का जैन मंदिर है। बताया जाता है कि 10वीं शताब्दी में यहां पर चांदपुर नाम से नगर हुआ करता था। जिसके अवशेष आज भी यहां मौजूद हैं।
मंदिर की मान्यता देवगढ़ जैन मंदिर से ज्यादा है। ऐसा कहा जाता है कि जब भी देवगढ़ में कोई कार्यक्रम होता है, तो सबसे पहले श्रीफ ल शांतिनाथ भगवान चांदपुर को चढ़ाया जाता है। एक बार चांदपुर के भगवान शांतिनाथ को बिना श्रीफ ल चढ़ाए देवगढ़ में कार्यक्रम किया गया था, जो सफ ल नहीं हुआ था। कार्यक्रम के तंबू व टेंट अपने आप ही हवा में उड़ने लगे थे। अतिशयकारी मंदिर के सामने बड़ा ग्राउंड है। जिसमें तलघर भी है। कोई पत्थर या ठोस चीज फेंकने पर तलघर से आवाज आती है।
प्रति वर्ष जनवरी में यहां मेला लगता है। चांदपुर जहाजपुर कमेटी की ओर से मेले की पूरी व्यवस्था की जाती है। सुनील जैन संचय बताते हैं कि चांदपुर जहाजपुर मार्ग का हाल बदहाल है। यहां पहुंचने के लिए श्रावकों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। डॉ. अक्षय अलया कहते हैं कि प्राचीन धरोहर को सहेजने के लिए जैन समाज ने काफी प्रयास किया है। सरकार को भी इस क्षेत्र के संरक्षण की पहल करनी चाहिए।