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एक साल में 400 लोगों को बनाया साइबर अपराधियों ने अपना शिकार

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झांसी। साइबर क्रिमिनल तेजी से अपना दायरा बढ़ा रहे हैं। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले एक साल के भीतर साइबर अपराधी जिले के 400 लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं। इन लोगों से नए-नए पैंतरे अपनाकर दो करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम ठगी जा चुकी है। किसी के खाते से अपराधियों ने पैसे उड़ा दिए, तो किसी को सोशल मीडिया पर इज्जत नीलाम करने का भय दिखाकर ठगी की। इनमें कम ही ऐसे खुशकिस्मत लोग हैं, जिन्हें अपनी खोई हुई रकम वापस मिल पाई।
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साइबर अपराध का शिकार होने के बाद फांसी लगाकर जान देने वाली यशस्वी पाराशर के पिता जगमोहन पाराशर ने घटना की शिकायत एक माह पहले 19 जून को पुलिस से की थी। उन्होंने पुलिस को बताया था कि कुछ लोगों ने बेटी को नौकरी दिलाने के नाम पर ऑनलाइन ठगी कर ली है। अलग-अलग बहाने से उनसे ये रकम किस्तों में बैंक में जमा कराई गई है। उन्होंने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर खोई हुई रकम वापस दिलाने की मांग की थी। लेकिन, न तो मामला दर्ज किया गया और न ही ठगी गई रकम को वापस दिलाने के लिए कोई कार्रवाई हुई। ये केवल एक मामला नहीं है। जिले में हर माह 30-35 लोगों को साइबर अपराधी अपना शिकार बनाते हैं। कभी बैंक खाते का डिटेल कर रकम उड़ा दी जाती है, तो न्यूड कॉल के जरिये ब्लैकमेल किया जाता है। ऑनलाइन शॉपिंग, सोशल प्लेटफार्म पर जाकर पुरानी गाड़ी व अन्य चीजें बेचने के नाम पर ठगी के भी मामले आए दिन सामने आते रहते हैं। फेसबुक आईडी हैक कर मदद के नाम पर पैसे मांगने के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। इनमें से ज्यादातर मामलों में शिकायत दर्ज नहीं हो पाती है। एफआईआर कायम होने के बाद इक्का-दुक्का मामलों में ही रिकवरी हो पाती है। यशस्वी के मामले में यदि पुलिस समय रहते एफआईआर कायम कर कार्रवाई कर देती तो शायद एक पिता को अपनी बेटी नहीं खोनी पड़ती।
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