झांसी। भाइयों! मैं इस समय जीवन के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा हूं। बस अब आप लोगों का ही सहारा है। मेरे पिता कैंसर से जूझ रहे हैं और उनका इलाज मुंबई में चल रहा है। इलाज पर पांच लाख रुपये खर्च कर चुका हूं, अब मेरे पास एक पाई भी नहीं बची है। तीन लाख रुपये की सख्त जरूरत है। पिता की जिंदगी का सवाल है। मेरी मदद करो, वरना इलाज न हो पाने की वजह से मेरे पिता मर जाएंगे। जिससे जो भी हो पड़े, मेरे अकाउंट नंबर में ट्रांसफर कर दें। मैं, जिंदगी भर आपका एहसानमंद रहूंगा। पिता के ठीक होने के बाद सभी का पैसा भी लौटा दूंगा। इसके लिए मैं दिन रात मेहनत करूंगा। प्लीज, मेरे पिता की जान बचा लीजिए। फेसबुक पर इस तरह की भावुक अपील आए दिन देखने को मिलती हैं। लेकिन, सावधान रहें। पूरी तस्दीक किए बगैर किसी की कतई मदद न करें, क्योंकि साइबर अपराधी भावुक अपीलों के जरिये लोगों को ठगने का काम कर रहे हैं। पुलिस की साइबर सेल में रोजाना इस तरह के मामले पहुंच रहे हैं। पिछले एक महीने के दरम्यान इस तरह की चालीस शिकायत पुलिस के पास आ चुकी हैं।
केस - 1
दोस्त की मदद की, लेकिन ठगा गया
झांसी। एक महीने पहले आवास विकास कॉलोनी निवासी मनोज दीक्षित की फेसबुक अकाउंट पर उनके एक करीबी दोस्त की पोस्ट पड़ी हुई थी, जिसमें लिखा था कि कोरोना से हालत गंभीर है। रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीदने के लिए दो लाख रुपये की तुरंत जरूरत है। उनके दोस्त ने पत्नी का बैंक खाता नंबर दिया था, जिसमें पैसे डालने की अपील की थी। मनोज ने तत्काल दस हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। दो दिन दोस्त का हालचाल पता करने के लिए फोन किया तो पता चला कि वो एकदम स्वस्थ है और उसके कोरोना नहीं हुआ है। तब उन्हें पता चला कि वे ठगी का शिकार हो गए हैं।
केस - 2
रिश्तेदार के नाम पर की 20 हजार की ठगी
झांसी। सतीश नगर के सुनील गौतम की फेसबुक आईडी पर उनके दिल्ली में रहने वाले रिश्तेदार के नाम की पोस्ट पड़ी हुई थी, जिसमें बताया था कि वे पूरे परिवार के साथ कोरोना संक्रमण के शिकार हो गए हैं। पत्नी और बेटे की हालत ज्यादा खराब है। उनका नोएडा में इलाज चल रहा है। मेरे पास पैसा है, लेकिन अभी ट्रांसफर करने की स्थिति में नहीं हुई। ढाई लाख रुपये अस्पताल की फीस दो घंटे में जमा करनी है। मेरे जानने वाले तुरंत पैसा का इंतजाम कर दें, ठीक होते ही सभी पैसा लौटा दूंगा। सुनील ने तत्काल बीस हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में पता चला कि रिश्तेदार की फेसबुक आईडी हैक कर किसी साइबर अपराधी ने पैसों की मांग थी।
केस - 3
कृष्णकांत के नाम पर बटोरे पैसे, उन्हें पता ही नहीं
झांसी। उन्नाव गेट बाहर निवासी कृष्णकांत के पास 27 अप्रैल को सुबह उनके एक रिश्तेदार का फोन आया और पूछा की अब पिताजी की तबीयत कैसी है। कृृष्णकांत ने कहा कि पिता एकदम ठीक हैं और वे तो बीमार हुए ही नहीं। रिश्तेदार ने कहा कि तुमने तो फेसबुक पर पोस्ट डालकर पिता के इलाज के लिए पैसा मांगा था और मैंने पांच हजार रुपये भी ट्रांसफर किए थे। इसके बाद कृष्णकांत के पास दिन भर में कई दोस्त और रिश्तेदारों के फोन आए, जिन्होंने फेसबुक पोस्ट पढ़ने के बाद अकाउंट में रकम ट्रांसफर की थी। तब जाकर कृष्णकांत को पता चला कि उनकी फेसबुक आईडी हैक कर उनके नाम से उनके नजदीकियों को ठग लिया गया है।
केस - 4
सजगता से खुद बचे, औरों को भी बचाया
झांसी। ललितपुर रोड सिविल लाइन निवासी हेमंत शर्मा की फेसबुक आईडी पर एक पोेस्ट आई, जिसमें उनके एक कानपुर में रहने वाले दोस्त ने मां के इलाज के लिए पैसे की मांग की थी। जबकि, हेमंत की एक दिन पहले ही अपने दोस्त से बात हुई थी और उसने ऐसा कुछ भी नहीं बताया था। माजरा समझते ही हेमंत ने तत्काल दोस्त को फोन कर इसकी जानकारी की। दोस्त ने बताया कि ऐसा कुछ भी नहीं है। दोस्त ने तत्काल इसकी सूचना साइबर पुलिस को दी। पुलिस ने तत्काल पोस्ट ब्लॉक कर दी। साथ ही दोस्त ने फेसबुक पर पोस्ट डालकर सच्चाई बताई और सभी को सतर्क रहने के लिए कहा।
ये सावधानी बरतना बेहद जरूरी है -
- अपना फेसबुक पासवर्ड कतई किसी से साझा न करें। परिवार के लोगों से भी नहीं। किसी की भी भूल से पासवर्ड साइबर अपराधियों तक पहुंच सकता है।
- किसी भी फोन कॉल या मेसेज पर अपना बैंक डिटेल, एटीएम का पासवर्ड किसी को न दें, जरूरत होने पर ये केवल बैंक शाखा में जाकर बैंक कर्मचारी से ही साझा करें।
- किसी की मदद करना बुरी बात नहीं है, लेकिन मदद करने से पहले इस बात की अच्छी तरह से तस्दीक कर लें कि मदद मांगने वाला सही व्यक्ति है या नहीं, अन्यथा अपने कदम पीछे खींच ले।
- साइबर अपराध का शिकार होने पर तत्काल सूचना पुलिस को दें, इसके जरिये अन्य लोगों को ठगी का शिकार होने से बचाया जा सकता है।
पुलिस लगातार लोगों को जागरूक करती आ रही है। इसके लिए समय - समय पर अभियान भी चलाए जाते हैं। सतर्क रहकर ही साइबर क्राइम से बचा जा सकता है। बावजूद, यदि कोई ठगी का शिकार हो जाता है तो तत्काल सूचना पुलिस को दें।
- विवेक त्रिपाठी, एसपी सिटी