नगर निगम ने अवैध होर्डिंग हटाने का अभियान शुक्रवार से शुरू कर दिया। पहले दिन अभियान वह रफ्तार नहीं पकड़ सका, जिसकी उम्मीद थी। दरअसल होर्डिंग हटाने के दौरान विभागीय अफसरों के पास सिफारिशी फोन आए और अभियान रोक दिया गया। इसके पहले टीम ने हथौड़े और गैस कटर के जरिए 35 स्ट्रक्चर काटे और जब्त किए। साथ ही बल्लियों पर लगे 80 होर्डिंग हटा दिए गए। शनिवार को होर्डिंग की नंबरिंग होगी। नगर आयुक्त का कहना है कि अभियान जारी रहेगा, सिफारिश मानने का सवाल ही नहीं है।
शुक्रवार की सुबह दस बजे से इलाइट चौराहा से मेडिकल कालेज मार्ग पर अवैध होर्डिंग हटाने का अभियान शुरू हुआ। इलाइट चौराहा पर बल्लियों के सहारे लगे होर्डिंग हटा दिए गए। आगे बढ़ने पर थाना नवाबाद के पास और आसपास के लगे होर्डिंग हटा दिए गए। अभियान जेल चौराहा, कचहरी चौराहा, बस स्टैंड, मेडिकल कालेज होते हुए कानपुर बाईपास तक चलाया गया। 35 अवैध स्ट्रक्चर गैस कटर से काट दिए गए। 80 होर्डिंग जो बल्लियों के सहारे टिके थे, उन्हें हटा दिया गया।
अभियान अभी चल रहा था कि कुछ लोगों ने नगर निगम के अफसरों को फोन लगाने शुरू कर दिए। एक बार तो फोन करने वाले को टाला गया, लेकिन उसने दूसरी बार, फिर तीसरी बार फोन किया तो फिर होर्डिंग हटाने का अभियान रोक दिया गया। अभियान के दौरान होर्डिंग हटाओ प्रभारी केशव प्रसाद मौजूद रहे।
मनमानी नंबरिंग
नगर निगम की टीम ने जब अवैध स्ट्रक्चर काटने शुरू किये तो कुछ लोग पहुंच गए कि इस पर नंबर गलत डला है। जब टीम के अफसरों ने तीन- चार और होर्डिंग चेक किए तो पता चला कि सभी की नंबरिंग गलत है। हालांकि, टीम ने कोई रियायत नहीं बरती और होर्डिंग के स्ट्रक्चर काट लिए।
बहस भी हुई
होर्डिंग हटा रही टीम को तीखी बहस का सामना करना पड़ा। हुआ यूं कि जब टीम होर्डिंग हटा रही थी तो कुछ लोग पहुंच गए और दबाव बनाने लगे कि होर्डिंग न हटाएं, लेकिन कोई राहत नहीं दी गई। इस पर वह बहस करने लगे, लेकिन काफी देर के बाद जब कोई समाधान नहीं निकला तो उन्होंने उच्च अधिकारियों को फोन लगा दिया।
ये कैसा दबाव?
होर्डिंग लगाने का ठेका अबकी बार केवल एक कंपनी मीडास को मिला है, लेकिन स्थानीय एडबरटाइजर्स अफसरों पर दबाव बना रहे हैं कि किसी तरह उन्हें भी ठेका में शामिल कर लिया जाए। प्रत्यक्ष रूप से तो अफसर कुछ कर नहीं पा रहे हैं। क्योंकि, कंपनी और नगर निगम की शर्तों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिससे किसी को घुसने का मौका दिया जा सके।
ठेका नहीं तो कैसी नंबरिंग
शहर में केवल एक कंपनी का ठेका है। इसलिए दोबारा होर्डिंग की नंबरिंग कराने का कोई औचित्य समझ में नहीं आ रहा है। माना जा रहा है कि अब केवल अवैध होर्डिंग के अभियान को उलझाने का काम किया जा रहा है, ताकि समय को टाल दिया जाए।
ठेका समाप्त, फिर भी करा रहे फोन
नया वित्त वर्ष शुरू होने के बाद से स्थानीय एडवरटाइजर्स का होर्डिंग का ठेका समाप्त हो गया है। नगर निगम ने सभी आठ एडवरटाइजर्स को नोटिस दे दिया था कि होर्डिंग हटा लें। इसके बाद अब नगर निगम अधिकारियों पर सिफारिशों के जरिए दबाव बनाया जा रहा है।
नहीं मानेंगे किसी की सिफारिश
अवैध होर्डिंग हटाने का काम जारी रहेगा। इसमें किसी की सिफारिश नहीं मानी जाएगी। फोन आए थे, लेकिन काम नहीं रुकवाया गया।
- अरुण प्रकाश
नगर आयुक्त