महानगर के झोकन बाग में भूमाफियाओं द्वारा कॉलोनी को विकसित करने के उद्देश्य से एक हेक्टेयर में फैले पहाड़ को काटा जा रहा था। शिकायत मिलने पर प्रशासन ने जांच टीम को भेजकर काम को रुकवा दिया था। प्रशासनिक अफसरों ने मंडलीय खान अधिकारी को पत्र लिखकर पहाड़ को काटने का कारण पूछा गया था। क्षेत्रीय खान अधिकारी के जवाबी पत्र में पहाड़ को टीला दर्शाया गया है। जबकि राजस्व विभाग के अभिलेखों में पहाड़ के रूप दर्ज है।
सालों से सरकारी अभिलेखों में दर्ज पहाड़ को काटने के लिए रॉकी गुप्ता व एक अन्य व्यक्ति ने खनन विभाग में तय शुल्क के साथ आवेदन किया था। आवेदन के बाद खनन विभाग द्वारा रॉयल्टी के नाम पर डेढ़ लाख रुपये जमा कराए गए थे। लेकिन, रॉयल्टी जमा करने के कुछ दिन के बाद आवेदक रॉकी गुप्ता की मृत्यु हो गई थी।
लेकिन कुछ लोगों ने मृत्यु होेने के बाद पहाड़ को काटने का काम शुरू कर दिया। शिकायत मिलने पर प्रशासन ने रोक लगाते हुए जांच के आदेश जारी किया था। प्रशासन ने क्षेत्रीय खान अधिकारी को लिखे पत्र में चालान जमा करने का आधार, पहाड़ को समतल करने का आधार के साथ ही अनुमति का आधार मांगा गया था।
लेकिन, खनन विभाग ने प्रशासन को दी गई रिपोर्ट में विशाल पहाड़ को टीला दर्शाया गया है। जिसके चलते खनन विभाग की रिपोर्ट पर ही कई सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। जब पहाड़ की जगह टीला है तो रॉयल्टी के नाम पर डेढ़ लाख रुपये किस आधार पर जमा कराए गए हैं। रिपोर्ट को सही माना भी जाए तो टीला खोदने के लिए भी जिला प्रशासन की अनुमति के अलावा कई विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया जाता है।
जो की खान विभाग द्वारा नहीं ली गई है। इसके अलावा टीले से मिट्टी निकलती है जबकि मौके पर पत्थर को काटा जा रहा है। इस संबंध में क्षेत्रीय खान अधिकारी नवीन दास ने बताया कि प्रशासन द्वारा रिपोर्ट मांगी गई थी। रिपोर्ट प्रशासन को दे दी गई है। कार्रवाई करने का अधिकार प्रशासन को ही है।
ये है हाईकोर्ट का नियम
हाईकोर्ट के निर्देशानुसार पर्यावरण की दृष्टि से किसी भी पहाड़, छोटी पहाड़ी, पर्वत, नदी व तालाब के स्वरूप को किसी भी दशा में बदला नही जा सकता है।
प्लॉटों को भी बेचा जा चुका है
पहाड़ को काटने का काम काफी समय से जारी है। नब्बे फीसदी पहाड़ को काट कर समतल किया जा चुका है। भूमाफियाओं द्वारा लगभग आठ लोगों को प्लॉट भी बेचे जा चुके हैं।