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हरीशंकर की आईडी पर सीएमओ की तस्वीर

Tue, 18 Oct 2016 12:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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sim card news jhansi - फोटो : demo
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 कोंच के गांधी नगर निवासी हरीशंकर की वोटर आईडी पर झांसी के सीएमओ डॉ. विनोद कुमार यादव की तस्वीर लगाकर मोबाइल सिम जारी कर बेच दी गई। इस बात का पता न तो सीएमओ को है और न ही हरीशंकर को। जिसने सिम खरीदी उसे खुद नहीं मालूम कि उसकी जगह किसके दस्तावेज लगे हैं? ऐसी ही फर्जी आईडी बनाकर प्रीएक्टीवेटिड सिम बेचने का कारोबार करने वाले अलीगोल निवासी आमिर अंसारी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस दस्तावेजों को सत्यापित करने वाले एरिया मैनेजर की तलाश कर रही है।    कोतवाली पुलिस को सूचना मिली थी कि अलीगोल क्षेत्र में स्थित मतवाली कॉलोनी में एक जालसाज अपने घर में ऑफिस बनाकर फर्जी आईडी बनाकर लोगों को बिना दस्तावेज लिए ही सिमकार्ड बेच रहा है। सूचना पर प्रभारी निरीक्षक आशीष मिश्रा ने फोर्स के साथ उक्त मकान में छापा मारकर कूटरचित दस्तावेजों और पहचान पत्रों को तैयार फर्जी तरीके से एयरसेल कंपनी के फर्जी सिमकार्ड एक्टिवेड कर रहे एक युवक को पकड़ लिया। पुलिस ने मौके से 552 प्री एक्टिवेंटिड सिमकार्ड, 913 अन्य सिमकार्ड, फर्जी एक्टिवेशन फार्म, 108 खाली एक्टिवेशन फार्म्स, 44 मोहरें व एक लैपटॉप बरामद किया। पकड़े गए आरोपी का नाम नाम आमिर अंसारी है। 
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सोमवार को कोतवाली में उक्त मामले का खुलासा करते हुए एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने बाजार में फर्जी नाम पते पर चालू सिमों की काफी मांग होती है, जो अधिक दामों में बिक जाती हैं। इस जालसाजी में आमिर का पार्टनर राजकुमार शिवहरे हैं। राजकुमार फर्जी आईडी तैयार करने का काम करता है। फर्जी आईडी तैयार करने के बाद वे दस्तावेजों का सत्यापन कंपनी के एरिया मैनेजर आवास विकास निवासी राजकुमार से करा लेते है। इसके बाद वे सिमों को ऑनलाइन एक्टिवेट करते हैं और उन्हेें रिटेलर्स के माध्यम से बाजार में बेच देते हैं। यह लोग इधर- उधर से आईडी एकत्रित करने के बाद वे किसी की भी तस्वीर कंप्यूटर की मदद से लगा देते हैं। आरोपी के पास से बरामद फार्मों में कई व्यापारी व अधिकारियों की तस्वीरें भी लगी पायी गई। इनमें सीएमओ डॉ. विनोद कुमार यादव, व्यापारी नेता हरभजन साहू की भी तस्वीरें शामिल हैं। एरिया मैनेजर व पार्टनर की तलाश की जा रही है। आरोपियों पर एनएसए की कार्रवाई होगी। 
साथ ही संबंधित कंपनी को पत्र लिखकर जानकारी हासिल की जा रही है कि उन्होंने उक्त डिस्ट्रीब्यूटर को कितने सिमकार्ड अभी तक जारी किए। इसके बाद बिना दस्तावेजों के सिम का प्रयोग कर रहे हैं, लोगों तक पहुंचा जाएगा। 
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थोड़े से लालच कर रहे थे देश की सुरक्षा से खिलवाड़ 
दस्तावेज लिए बिना ही प्रीएक्टीवेटेड सिमकार्ड बेचने का कारोबार कर रहे आमिर व राजकुमार सीधे देश की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे थे। हालांकि, पुलिस के अनुसार आरोपी का कहना है कि कंपनी की ओर से ज्यादा से ज्यादा सिम कार्ड बेचने का दबाव उन पर होता है। इसी दबाव के चलते वे लोग ज्यादा से ज्यादा सिम कार्ड एक्टिवेट करके कंपनी का टारगेट पूरा करते हैं, जिससे उनको कंपनी की ओर से इनसेंटिव और अन्य लाभ मिल सके। कम तादात में सिम की बिक्री होने पर कम कंपनी को नुकसान होता है।  


यह होती है प्रीएक्टीवेटेड सिम 
अगर किसी को मोबाइल सिम चाहिए तो उसे पहले डिस्ट्रीब्यूटर के पास अपने पहचान के दस्तावेज देने होेंगे। कंपनी 24 घंटे में दस्तावेजों की जांच करेगी। जांच उपरांत ही सिम चालू हो सकेगी। मगर, ऐसे जालसाज पहले ही फर्जी दस्तावेजों की मदद से सिम एक्टिवेट (चालू) करके रख लेते हैं। ग्राहक के मांगते ही उसे बिना दस्तावेजों के ही चालू सिम बेच दी जाती है। 
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