सोमवार को गुरसरांय से अपहृत छात्र अंशुल का अपहरण करने वाला मास्टर माइंड बुधवार को पुलिस की गिरफ्त में आ गया। वह मुहल्ले में ही पड़ोस में निवास कर रहा था। पुलिस ने मास्टर माइंड समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि पुलिस अभी साजिश में शामिल मास्टर माइंड के मौसेरे बहनोई की तलाश में जुटी हुई है। पुलिस ने साजिश में प्रयुक्त स्कार्पियो कार को भी बरामद कर लिया है।
अपहरण कांड का खुलासा करते हुए एसपी (ग्रामीण) दिनेश सिंह ने बताया कि सोमवार को गुरसरांय क्षेत्र के नई बस्ती मुहल्ला निवासी लोकेंद्र सिंह पटेल के पुत्र अंशुल (13 वर्ष) का बदमाश अपहरण कर ले गए थे। इसके बाद से ही पुलिस अपहरणकर्ताओं की तलाश में जुटी हुई थी। बुधवार को अपराह्न पुलिस को सूचना मिली कि बदमाश अंशुल को दतिया मार्ग से लेकर आ रहे हैं और शिवपुरी की तरफ भागने की फिराक में हैं। इसपर गुरसरांय थाना प्रभारी रुद्र सिंह व स्वाट टीम प्रभारी स्वतंत्र देव सिंह टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने घेराबंदी कर करारी रेलवे क्रासिंग के पहले ग्राम सारमऊ के पास बदमाशों को घेर लिया और गाड़ी से अंशुल को बरामद कर दो बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि एक बदमाश भागने में सफल रहा। पूछताछ में मास्टर माइंड पवन अग्रवाल पुत्र सिद्ध गोपाल ने बताया कि वह मूल रूप से गरौठा थाना क्षेत्र के भदरवारा खुर्द गांव का रहने वाला है तथा कुछ दिनों से गुरसरांय के मोहल्ला नईबस्ती में किराए का मकान लेकर लोकेंद्र सिंह पटेल के पड़ोस में रह रहा था, अन्य आरोपियों में ग्वालियर के नई सड़क निवासी मोनू मांझी पुत्र मुरारी लाल व फरार बदमाश का नाम कोंच क्षेत्र के मालवीय नगर निवासी दीपक अग्रवाल बताया गया है। दीपक पवन का मौसेरा बहनोई है।
एसपी (ग्रामीण) ने बताया कि घटना का मास्टर माइंड पवन है, उसने जल्द धनवान बनने के लिए यह साजिश रची थी। पवन कुछ दिन पहले तक पुणे की एक कंपनी में ड्राइवर था, जहां उसकी दोस्ती मोनू मांझी से हो गई थी। कंपनी में दीपक भी काम करता था। पिछले डेढ़ साल से पवन गुरसरांय में ही रहा है। वह कई दुकानों पर काम कर चुका है। वर्तमान में वह नगर के एक किराना व्यापारी की दुकान पर गुटका सप्लाई करने का काम करता है, जबकि दीपक कोंच में नमकीन बेचता है। पिछले दिनों तीनों ने जल्द पैसा कमाने के उद्देश्य से अपहरण की साजिश रच डाली। अपहरण के लिए पवन ने अंशुल को चुना। उनको इस बात का भरोसा था कि अंशुल अपने पिता का इकलौता पुत्र है तथा इनके पास तीस बीघा जमीन भी है, इसलिए वह अपने इकलौते पुत्र के बदले में आसानी से दस लाख रुपये की फिरौती दे देंगे।
उन्होंने बताया कि सोमवार को अपराह्न ढाई बजे अंशुल कोचिंग पढ़ने जा रहा था, तभी रास्ते में मोनू मांझी अपनी स्कार्पियो गाड़ी लेकर उसके निकट पहुंचा और रास्ता पूछने लगा। मोनू ने रास्ता दिखाने के नाम पर उसे गाड़ी में बिठा लिया। कुछ दूर जाकर पवन और दीपक भी गाड़ी में सवार हो गए और उन्होंने अंशुल कोपैरों के नीचे बिठाकर छुपा लिया। रास्ते में पानी के साथ कुछ नशीला पदार्थ पिला दिया, जिससे उसे नींद आने लगी। दतिया क्षेत्र के सेवढ़ा पहुंचने के बाद अपहरणकर्ताओं ने मोबाइल से अंशुल के पिता से संपर्क कर उनसे दस लाख फिरौती की मांग की। परिजनों ने जब इस बात की जानकारी पुलिस को दी तो पुलिस ने सक्रिय होकर कुछ घंटों में ही आरोपियों पर शिकंजा कस दिया।
अंशुल के परिजनों का यह है कहना
अंशुल के परिजनों के अनुसार कार में सिर्फ दो लोग थे, एक व्यक्ति कार चला रहा था तथा दूसरा व्यक्ति पीछे की सीट पर बैठा था, तथा अंशुल को पैर के नीचे डालकर उसपर पांव रखे रहा। यात्रा के दौरान उस व्यक्ति के पास लगातार फोन आते रहे। नीचे पड़ा अंशुल चुपचाप सभी फोनों को सुनता रहा। फोन पर बात करने वाले व्यक्ति गुरसरांय में हो रही प्रत्येक हलचल से उस को अवगत करा रहे थे।
ग्वालियर में ठहराया
अंशुल के अनुसार उसे ग्वालियर में एक अस्पताल के पीछे बने मकान में रात्रि में ठहराया गया। सुबह दस बजे झांसी जा रही एक बस में उसे सौ रुपये देकर अपहर्ताओं ने बैठा दिया। बस में बैठते ही अंशुल ने पास की सीट पर बैठे यात्री से अपने पिता का नंबर लगाने का अनुरोध किया। अंशुल के पिता ने उस यात्री तथा ड्राइवर से अपने पुत्र को सकुशल झांसी लाने का निवेदन किया। अंशुल के परिजनों के अनुसार झांसी पुलिस भी अंशुल को लेने के लिए सक्रिय हो गई। पिता तथा पुलिस के पहुंचने पर अंशुल को बीच रास्ते में ही पुलिस ने अपनी सुरक्षा में ले लिया। सर्विलांस की मदद से पकड़ा गया मास्टर माइंड अंशुल के गांव भदरवारा खुर्द का ही निकला तो वे हतप्रभ रह गए।
मास्टर माइंड देता रहा साथियों को पल-पल की सूचना
मास्टर माइंड पवन अग्रवाल मूल रूप से महोबा के चितेरी चितेरा गांव का निवासी है, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण करीब 25 वर्ष पूर्व अपने मामा के घर भदरवारा खुर्द अपनी मां, भाइयों व बहन के साथ आकर रहने लगा था। वर्तमान में छह माह से सपरिवार वह गुरसरांय में लोकेन्द्र पटेल के पड़ोस में ही किराये से रह रहा था। अपहरणकर्ता पवन अंशुल को अपने साथियों के सुुपुर्द करने के बाद उसके पिता लोकेन्द्र के साथ लगा रहा तथा प्रत्येक घटनाक्रम की जानकारी साथियों को देता रहा।
मोनू को शादी में मिली थी स्कार्पियो
घटना को अंजाम देने में प्रयुक्त की गई स्कार्पियो संख्या एमपी 07 सीबी 8236 मोनू मांझी को शादी में मिली थी। उसने भोपाल स्थित राजीव गांधी इंजीनियरिंग कालेज से बीटेक किया है। वर्तमान में वह पुणे की एक कंपनी में काम कर रहा है, और जहां उसे 25 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है। पर, उसकी महत्वाकांक्षाओं के सामने यह धनराशि बहुत कम थी, इस कारण वह अपहरण की साजिश में शामिल हो गया।