जिलेे में भले ही असलहे लगातार पकड़े जा रहे हों, लेकिन सौदागरों तक पुलिस अब तक नहीं पहुंच पा रही है। ऐसे में पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठने लगे हैं। दो माह के भीतर पुलिस ने अभियान चलाकर 157 लोगों तमंचा समेत पकड़ा। इस संबंध में पुलिस का कहना है कि पड़ोसी प्रदेश के जिलों से असलहे आ रहे हैं, जिसकी जांच हो रही है।
जिले में होने वाली अधिकतर घटनाओं में अवैध तमंचों का प्रयोग हो रहा है, लेकिन पुलिस अब तक किसी बड़े गिरोह को नहीं पकड़ सकी। लंबे समय से असलहे बनाने की फैक्ट्री का भी खुलासा नहीं हो सका। जबकि, आए दिन तमंचे से मारने व बरामद होने की घटनाएं सामने आ रही हैं। दो माह के भीतर जिले की पुलिस 157 अवैध असलहे बरामद कर चुकी है। इसके बाद पुलिस कहती है कि जल्द ही असलहों के सौदागरों को पकड़ा जाएगा, लेकिन होता कुछ नहीं।
किसने दिए असलहे, नहीं खोजती पुलिस
पुलिस असलहे तो बरामद करती है, लेकिन अभियुक्त के पास असलहे कहां से आए, इसकी पड़ताल करने की कोशिश नहीं होती। आखिर शहर से लेकर देहात तक असलहों की खेप कौन सप्लाई कर रहा? कौन है जो सबको असलहे बेच रहा है? असलहों के साथ- साथ गोलियां कहां से आ रही हैं? इन सब बातों की जांच पड़ताल के बजाय पुलिस फाइल बांधकर आलमारी में रख देती है।
चुनाव के चलते विशेष नजर
चुनाव को देखते हुए पुलिस ने विशेष नजर रखनी शुरू कर दी है। चुनाव में किसी तरह की कोई गड़बड़ी न हो इसको लेकर पुलिस ने पुराने मामले
मामले भी खंगालना शुरू कर दिए हैं। जो लोग असलहोें के मामलों में जेल जा चुके हैं और जमानत पर बाहर हैं, ऐसे लोगों पर नजर रखी जा रही है।
असलहे बरामद होने के बाद उनकी तह तक जाने के लिए थानेदारों को निर्देश दिए गए हैं।
डॉ. ओपी सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक