जेडीए की सीमा में शामिल किए गए 62 गांवों में बिना नक्शा पास कराए बनाए गए मकान अवैध माने जाएंगे। इन गांवों में जेडीए के बोर्ड लगाएगा, जिसमें यह संदेश लिखा होगा। झांसी विकास प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया। बैठक में आय के स्रोत बढ़ाने पर जोर दिया गया। निर्माण व विकास शुल्क चार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 12 करोड़ तथा शमन शुल्क 80 लाख रुपये से बढ़ाकर चार करोड़ रुपये करने पर सहमति बन गई। वित्त वर्ष 2017-18 में विभाग की आय 34.32 करोड़ रुपये प्रस्तावित की गई, जिसे और बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
सोमवार को मंडलायुक्त सभागार में हुई बैठक में मंडलायुक्त अमित गुप्ता ने कहा कि 62 गांवों में बोर्ड लगाने की जिम्मेदारी संबंधित अवर अभियंता की होगी। उन्हाेंने दो दिन में काम पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने गांवों के सर्वे में हो रही देरी पर नाराजी व्यक्त की और दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए। सर्वे के लिए तीन महीने का समय दिया था, लेकिन नौ महीने हो गए हैं। सर्वे पूरा नहीं हो पाने के कारण महायोजना का काम पूरा नहीं हो पा रहा है। उन्होंने अफसरों को फटकार लगाई।
पं. दीनदयाल उपाध्याय सभागार के सुदृढ़ीकरण कार्य को स्वीकृति दे दी गई। मंडलायुक्त ने कहा कि जो भी कार्य हो, वह पूर्ण गुणवत्ता के साथ किया जाए। सुदृढ़ीकरण पर तीन करोड़ रुपये खर्च होंगे, इससे सीलिंग और कुर्सियां बदलने, टॉयलेट व बाथरूम का रेनावेशन होगा। बिजली की बायरिंग बदली जाएगी, रंगाई, पुताई के अलावा सड़क का डामरीकरण किया जाएगा। अवैध निर्माण तोड़ने के लिए जेसीबी खरीदने पर सहमति बन गई। अभी जेडीए को नगर निगम की जेसीबी मांगनी पड़ती है।
पंचतंत्र पार्क को रखरखाव के लिए निजी संस्था को देने तथा फिर से टेंडर निकालने के निर्देश दिए। किला में फ्लड लाइट फिर से शुरू करने पर सहमति बन गई। अमृत योजना के अंतर्गत झांसी के विकास की महायोजना तैयार करने के लिए नगर नियोजन विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया।
इस मौके पर जिलाधिकारी कर्ण सिंह चौहान, जेडीए उपाध्यक्ष चंद्रविजय सिंह, नगर आयुक्त अरुण प्रकाश, जेडीए सचिव आरपी मिश्रा, सहयुक्त नियोजक एन के पुष्कर्ण, उपायुक्त उद्योग सुधीर कुमार श्रीवास्तव उपस्थित रहे।
नहीं छुए एजेंडा के प्रस्ताव
मंडलायुक्त ने बोर्ड बैठक में जेडीए द्वारा तैयार किए गए ज्यादातर प्रस्तावों की ओर ध्यान ही नहीं दिया, बल्कि उन्होंने कहा कि पहले से एजेंडा उनके पास क्यों नहीं आया। यदि आता तो विचार किया जा सकता था। इस कारण करारी में नगर निगम की सौ एकड़ जमीन के अधिग्रहण का मामला अटक गया। संविदा कर्मियों का रिन्यूवल नहीं किया गया, बल्कि गाजियाबाद प्राधिकरण की नियमावली मंगाने और उसका अध्ययन करने के निर्देश दिए गए। इस कारण लिपिक का भी रिन्यूवल नहीं हो सका। मेडिकल कालेज के पहले झलकारी बाई कांपलेक्स की दुकानें किराए पर देने के मामले में मंडलायुक्त ने कहा कि पहले इसकी जानकारी लाओ कि इन दुकानों की नीलामी कितनी बार की गई।
62 गांवों में चार साल से कुछ नहीं हुआ
26 नवंबर 2013 को जेडीए सीमा में शामिल 62 गांवों का गजट प्रकाशित हो गया है। इससे तय हो गया था कि यह गांव पूरी तरह से जेडीए के नियंत्रण में आ गए हैं। इन गांवों में होने वाले किसी भी तरह के विकास अथवा निर्माण कार्य के लिए प्राधिकरण से अनुमति लेना अनिवार्य है, लेकिन चार साल से इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
यह 62 गांव हैं जेडीए की सीमा में
बरुआसागर क्षेत्र के लक्ष्मनपुरा, वनगुवां, नौटक्षीर, कोलवा, बरेठी, फुटेरा बरुआसागर, हरपुरा, ताल रमन्ना, घुघुवा, चिपलौटा, दानीपुरा, बड़ागांव क्षेत्र के दौन, दुनारा, सुजाटा, भूपनगर, बचावली खुर्द, बचावली बुजुर्ग, बड़ागांव, तौरबराटा, बराटा, पारीछा, रिछौरा, मथनपुरा- रमपुरा, मड़ोरा, गढ़मऊ, पठेश्वर, आरी, बेहटा, भरारी, लकारा, रूंदकरारी, रौनीजा, अंबाबाय, चंद्रा, कलोथरा, सारमऊ, सिमरा, गेवरा, रक्साक्षेत्र के पुनावली कलां, डोमागोर, ढिकौली, कोटखेरा, रक्सा, डगरवाहा, पठारी, डोंगरी, गुढ़ा, रमपुरा, मठ, बाजना, बमेर, राजापुर, गागौनी, बरुआपुरा, मुरारी, चमरुआ, किल्चवारा खुर्द, किल्चवारा बुजुर्ग, बैदोरा, खजराहा खुर्द और खजराहा बुजुर्ग शामिल हैं।
पहले के गांवों पर भी ध्यान दीजिए
12 अक्तूबर 1984 को गठित झांसी विकास प्राधिकरण में तत्कालीन नगर पालिका झांसी समेत आसपास के 39 राजस्व ग्रामों डड़ियापुरा, करगुवां, सिमराहा, सिंगर्रा, भगवंतपुरा, दिगारा, डिमरौनी, गोरामछिया, पिछोर, कोछा भांवर, मैरी, मुस्तरा, टांकोरी, छपरा, पाड़री, भोजला, सिमरधा, करारी, परबई, बूढ़ा, नयागांव, पाड़री, पलींदा, पाली पहाड़ी, लहरगिर्द, सिजवाहा, अठौंदना, रुद्र पंचमहल, गढ़िया, हंसारी गिर्द, बलौरा, रूंद बलौरा, बिजौली, सफा, हरचंदपुरा, सैंयर, मथुरापुरा, खैलार व सिमरावारी को शामिल किया गया था। इन गांवों में भी बिना मानचित्र स्वीकृति के धड़ल्ले से मकान बन रहे हैं। जब इन गांवों की ओर जेडीए ध्यान नहीं दे पा रहा है तो बाद में शामिल किए गए 62 गांवों का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
नक्शा पास नहीं, फिर कैसे बन गया स्लाटर हाउस
नगर आयुक्त अरुण प्रकाश ने बताया कि भगवंतपुरा में अलमर्जिया के नाम से स्लाटर हाउस बना है। इस पर मंडलायुक्त ने पूछा कि उसका नक्शा पास है या नहीं। बताया गया कि नक्शा नहीं है। इस पर उन्होंने अफसरों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि जेडीए हर स्तर पर लापरवाही कर रहा है। उन्होंने जेडीए सचिव को भी फटकार लगाई।