एटा में हादसे के दौरान 12 स्कूली बच्चों की मौत के बाद संभागीय परिवहन विभाग (आरटीओ) और यातायात पुलिस विभाग की तंद्रा भंग हुई। शुक्रवार को दोनों विभागों के अधिकारियों की टीम ने स्कूली वाहनों की चेकिंग का अभियान चलाया तो कई गड़बड़ियां सामने आईं। 40 चालान काटे गए और हिदायत दी गई कि वाहनों की फिटनेट चेक करवाएं। नियमों का पालन करें।
अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में स्कूली वाहनों की खबर प्रकाशित कर उजागर किया गया था कि नियमों और मानकों की किस तरह धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इसके बाद आरटीओ और यातायात पुलिस ने शुक्रवार दोपहर स्कूली वाहनों की चेकिंग का अभियान चलाया। एआरटीओ (प्रवर्तन) सिद्धार्थ यादव और यातायात पुलिस प्रभारी सुभाष यादव टीम सहित इलाइट चौराहे पहुंचे। वहां ढाई घंटे तक स्कूली वाहनों की चेकिंग की तो पता लगा कि ज्यादातर नियमों का पालन नहीं कर रहे थे। देखा कि स्कूली वाहनों के नाम पर ऑटो इस्तेमाल किए जा रहे हैं। पांच की जगह 10-12 बच्चों को बेतरतीब तरीके से बैठाया गया है। कई वाहनों की सालों से फिटनेस चेक नहीं हुई। कई के पास जरूरी दस्तावेज नहीं थे। एआरटीओ ने बताया कि अभियान के दौरान 40 स्कूली वाहनों में कमी पाई गई तो उनका चालान किया गया।
एआरटीओ सिद्धार्थ यादव ने बताया कि शनिवार को भी स्कूली वाहनों की चेकिंग का सघन अभियान चलाया जाएगा। चालान के बाद भी चालक नहीं माने तो वाहन सीज कर दिए जाएंगे। यातायात पुलिस प्रभारी सुभाष यादव ने बताया कि अब नियमित अभियान चलाया जाएगा।
बोले स्कूल संचालक
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हमारे स्कूल में ऑटो से बच्चे आते हैं। वे स्कूल परिसर में ही उतरते और बैठते हैं। हर ऑटो और उसके चालक का ब्यौरा रखते हैं। क्षमता से ज्यादा बच्चे बैठने नहीं देते हैं। मैं खुद अक्सर इलाइट और इलाहाबाद बैंक चौराहे पर स्कूली वाहनों को चेक करते हैं।
तवरेज खान, डायरेक्टर द वुड्स हेरीटेज स्कूल
हमारे स्कूल में पांच बसें चलती हैं, जिनकी फिटनेस अपडेट है। बसों पर पुराने और अनुभवी ड्राइवरों को लगाया है। उन्हें हिदायत है कि 10-15 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ज्यादा नहीं चलेंगे। बसों में जितनी सीटें हैं, उतने ही बच्चों को बैठाया जाता है।
गौरव मिश्रा, डायरेक्टर महात्मा हंसराज स्कूल
ये कमियां मिलीं
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- कई वाहनों में आगे और पीछे स्कूली वाहन नहीं लिखा था।
- वाहन में फस्ट एड बॉक्स (चिकित्सा उपकरण) नहीं मिला।
- खिड़कियों में जाली और अग्निशमन यंत्र नहीं मिले।
- कई चालकों के पास ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं मिला।
- किसी भी स्कूली वाहनों में जीपीएस सिस्टम नहीं मिला।