झांसी। विशेष न्यायाधीश एससी /एसटी एक्ट डा. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने हत्या के एक मामले में आठ अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
दतिया गेट बाहर निवासी अमित रजक ने 24 जुलाई 2012 को थाना कोतवाली में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया था कि उसके घर के सामने महेश, अपने भाई सुरेश व पुत्रों के साथ परिवार समेत रहता है। सुरेश अंडे का ठेला लगाता था। वह आए दिन अंडे के छिलके उसके घर के सामने डाल देता था। सुबह करीब नौ बजे छिलके डालने से मना करने पर सुरेश व महेश उसे जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने लगे।
गाली देने से मना करने पर विपक्षियों ने अपने पुत्र नीरज, जितेंद्र, दिलीप, सोनू, बंटी और गुड्डू को बुला लिया। घर के अंदर घुस कर तमंचों के बल पर उसे व उसके दो भाइयों को धमकाने लगे। किसी तरह तीनों जान बचाकर भागे। विपक्षियों ने जान से मारने की नीयत से फायर कर दिए। इसमें एक गोली अर्जुन रजक को लगी तथा उसने मेडिकल कालेज में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।
अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद उक्त सभी अभियुक्तों को धारा 302 व धारा 3(2) एससी एसटी एक्ट में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा 25-25 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर दो-दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। धारा 307 में दस-दस साल व धारा 147 में दो-दो साल के कारावास की सजा सुनाई। जबकि, दिलीप कुशवाहा को धारा 25 में तीन वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।