झांसी। सावधान! अब बैंक जाना-आना सुरक्षित नहीं है। यदि आपको जाना है, तो संभलकर जाएं। खासतौर पर बैंक के अंदर और बाहर विशेष सतर्क रहें।
पुलिस की बैंकों के आसपास की सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ कागजों पर चल रही है, जिसकी वजह से बदमाश आसानी से लोगों को लूटपाट व टप्पेबाजी का शिकार बना रहे हैं। वारदात के बाद पुलिस मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल करके बदमाशों की तलाश में लकीरें पीटती हैं।
पुलिस रिकार्ड के अनुसार शहर के अति व्यस्त और सुरक्षित इलाकों में 12 दिन के अंदर एक लूट व दो टप्पेबाजी की वारदातों को बदमाश अंजाम दे चुके हैं। तीन-चार ऐसी वारदातें हैं, जिनको पुलिस ने दर्ज करना भी मुनासिब नहीं समझा है।
दर्ज वारदातों में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बदमाशों का हुलिया पहचाने के लिए सीसीटीवी कैमरों के फुटेज से कब्जे में लिये। इस दौरान बदमाशों की धरपकड़ के लिए घेराबंदी और चेकिंग सिर्फ कागजों में की गई।
इसकी पुष्टि सात फरवरी को आईसीआईसीआई बैंक के अंदर हुई टप्पेबाजी, 12 फरवरी को चित्रा चौराहा के पास महिला से हुई लूट और 16 फरवरी को एसएसपी आवास के सामने स्थित जानकी पुरम् कालोनी में हुई पांच लाख रुपये की टप्पेबाजी है। तीनों वारदातों के बाद चौतरफा वाहनों की चेकिंग के आदेश हुए, जो बीच चौराहों पर हवा हवाई होते दिखे।
यही नहीं, वारदात के बाद लुटी महिला और टप्पेबाजी के शिकार राजीव कुमार पांडेय ने बताया कि बदमाश स्टेडियम के सामने स्थित स्टेट बैंक में मिले थे। बदमाशों ने महिला का पीछा किया वहीं राजीव को नगदी गिरने की बात कहकर शिकार बनाना चाहा। इन वारदातों से स्पष्ट है कि बैंकों के आसपास पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ कागजों पर चल रही है।
वारदात के बाद सघन चेकिंग होनी चाहिए। वह पता करेंगे कि आखिर क्यों चेकिंग हकीकत में नहीं हुई। लुटेरों और टप्पेबाजों की धरपकड़ के लिए पूर्व में बनी योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा।
सभा राज
एसएसपी, झांसी