आईटीआई कालेज क्षेत्र में हाइवे निर्माण के लिए पत्थर तोड़ने के लिए विस्फोट किया जा रहा था। डायनामाइट एवं जिलेटिन की छड़ों से हुए विस्फोट से पत्थर हवा में उड़ते हुए आसपास की बस्ती में जा गिरे, जिससे 12 मकान क्षतिग्रस्त हो गए। इन मकानों में रहने वाले आठ लोग घायल हो गए। घायलों में छह बच्चे तथा एक महिला व पुरुष शामिल हैं। नाराज लोगों ने प्लांट में गार्ड के साथ मारपीट करते हुए प्लांट में आग लगी दी।
रविवार को एक निजी कंपनी द्वारा रेलवे स्टेशन से लगभग दो किलोमीटर दूर निचरौली रोड पर आईटीआई कालेज क्षेत्र में बिना तकनीकी इंजीनियर की उपस्थिति में ब्लास्टिंग कराई जा रही थी। घटना की जानकारी मिलते ही कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी, सिविल लाइन थाना प्रभारी व पुलिस बल मौके पर पहुंचा और घायलों को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय भेजा गया। घटना से नाराज बस्ती के लोगों ने ब्लास्टिंग करने वाले ठेकेदार के मिक्सर प्लांट पर हमला बोलकर प्लांट के सुरक्षा गार्ड की जमकर मारपीट की। जिससे वह भी गंभीर रूप से घायल हो गया। नाराज लोगों का गुस्सा इतने में ही शांत नहीं हुआ। उग्र भीड़ प्लांट के अंदर घुस गई और प्लांट में बने कमरों, वाहनों में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। जिससे कंपाउंड में खड़ी एक गाड़ी, एक रोड रोलर एवं लेबर के लिए बनी मेस जलकर नष्ट हो गई। आगजनी में मेस में रखे छह गैस सिलिंडर जल गए। दतिया, बड़ौनी एवं भांडेर नगर पालिका की फायर ब्रिगेड गाड़ियाें को आग पर काबू पाने के लिए लगभग तीन घंटे लग गए।
हादसे के बाद जब पुलिस ने बस्ती के लोगों की मांग पर ठेकेदार के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की तो नाराज बस्ती के लोगों ने शाम छह बजे ग्वालियर झांसी हाइवे मार्ग पर जाम लगा दिया। जिससे आने जाने वाले वाहनों को परेशानी का सामना करना पड़ा। घटना पर पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने कहा कि विस्फोट की विस्तार से जांच की जा रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, घायलों को प्रशासन द्वारा हर संभव सहायता पहुंचाई जाएगी। प्रशासन इस बात की भी जांच कर रहा है कि ठेकेदार को खनिज विभाग द्वारा ब्लास्टिंग करने का लाइसेंस दिया गया है या अवैध रूप से ब्लास्टिंग की जा रही है।
ये लोग हुए घायल
इस घटना में रोशनी अहिरवार (15), गौरीशंकर अहिरवार (15) , अभिषेक (11), टिंकू (12), रितिक (10), जयराम पाल, आराधना(20) पत्नी दीपक एवं यशपाल उम्र 15 वर्ष घायल हुए हैं। जिन्हें उपचार के लिए जिला चिकित्सालय भेजा गया।
यह है विस्फोट करने का तरीका
नियमानुसार किसी भी पत्थर खदान में जब डायनामाइट लगाकर विस्फोट किया जाता है तो प्रथम दृष्टया यह देखा जाता है कि जिस जगह विस्फोट किया जा रहा है उसके 500 मीटर क्षेत्रफल में कोई बस्ती तो नही हैं। विस्फोट के पहले आवागमन बंद कर दिया जाता है। साथ ही, क्षेत्र में रहने वाले लोगों को सूचना दे दी जाती है, लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।