नियम तोड़ने में युवा बाइकर्स अव्वल
- पिछले साल पांच हजार से अधिक युवाओं के काटे चालान
- जिले में लगातार बढ़ रही बाइक चलाने वालों की संख्या
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। शहर में यातायात नियमों का धड़ल्ले से उल्लंघन हो रहा है। युवा बाइकर्स नियमों को तोड़ने में अव्वल हैं। लगातार चालान के बाद भी स्थिति सुधार नजर नहीं आ रहा है। यातायात नियमों का पालन न करने से दुर्घटनाएं भी बढ़ी हैं।
जिले में युवा वर्ग को बाइक का शौक खूब चढ़ रहा है। बात बाइक रखने के शौक तक ही सीमित नहीं है बल्कि बाइकर्स जिले की सड़क पर दौड़कर नियम को तोड़ने में सबसे आगे हैं। यही वजह है कि जिले में यातायात नियमों को तोड़ने में बाइकर्स सबसे आगे निकल गए हैं। आंकड़ों पर नजर डाले तो पिछले एक साल के दौरान अकेले पांच हजार से अधिक बाइकर्स के चालान पुलिस ने किए हैं। इनमें से 80 प्रतिशत से अधिक चालान तीन सवारी के रहे, जबकि बाकी अन्य कारणों के चलते चालान बाइकर्स के कटे हैं। बाइक चलाने वाले सड़क पर दौड़कर वाहनों को भी अपने वाहनों तले रौंद रहे हैं। हेलमेट न पहनने, दो से अधिक लोगों के बैठने, बीमा, कागजात आदि नियमों का पालन नहीं करना बाइकर्स की शान बन गई है। ऐसे में जब यातायात पुलिस इन पर शिकंसा कसती है तो धड़ाधड़ चालानों की बौछार भी हो जाती है। जिले में जनवरी से लेकर अब तक ढ़ाई हजार से अधिक बाइकर्स नियमों को तोड़ चुके हैं।
चलती बाइक पर मोबाइल का इस्तेमाल
चलती बाइक पर मोबाइल पर बात करना या ईयर फोन पर गाने सुनना बाइक राइडर्स का फैशन बन गया है। कई बार ध्यान बंटने पर नियंत्रण खो बैठते हैं और हादसे की संभावना बनी रहती है। फिर भी यह शौक सिर चढ़कर बोल रहा है।
पुलिस के लिए परेशानी
जिले में बाइकर्स पुलिस के लिए परेशानी भी बने हुए हैं। बाइक पर भी चैन स्नेचिंग की घटनाएं भी शहर में हो रही हैं, जिनका खुलासा अब तक पुलिस नहीं कर पाई है। इसके अलावा तेज गति से बाइक चलाने के अलावा तीन से अधिक बैठकर बाइक चलाने वालों की संख्या भी अधिक है।
सुझाव नंबर-1
- यहां कुछ हद तक अभिभावक भी कसूरवार हैं, जो बच्चों को किशोरावस्था में जिद पर दोपहिया वाहन देते हैं। इस दिशा में अभिभावक ही सुधार ला सकते हैं। अभिभावकों को चाहिए कि लाइसेंस बनने की उम्र में ही अपने बच्चों को वाहन चलाने के लिए दें, उन्हें यातायात नियमों बारे में पूरी तरह गाइड करें।
सुझाव नंबर-2
- स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने वाले अधिकांश छात्रों के पास दोपहिया वाहन होते हैं। ऐसे में यदि स्कूल-कॉलेज पर स्तर पर उन्हें यातायात के नियमों और वाहन चलाते वक्त बरती जाने वाली सावधानियों से अवगत कराया जाए तो भी सुधार लाया जा सकता है।
स्कूल-कॉलेजोें में चल रहा अभियान
युवाओं को जागरूक करने के लिए स्कूल व कॉलेजों में अभियान चलाया जा रहा है। सड़क पर यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों का पुलिस चालान भी कर रही है।
सुभाष यादव, टीएसआई