गोरखपुर के ध्यानार्थ
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सड़क दुर्घटना में इंजीनियरिंग छात्र की मौत
सब हेड... हेलमेट पहने होता तो बच जाती जान
- ट्रक से बचने के चक्कर में डिवाइडर से टकराई बाइक
- बीती रात हुए हादसे में साथी छात्र भी घायल
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बीती रात हुई सड़क दुर्घटना में बुंदेलखंड इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बीआईईटी) के एक छात्र की मौत हो गई। जबकि, उसका साथी घायल है, जिसका महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज में उपचार जारी है। दोनों छात्र रात में खाना खाने जा रहे थे। इसी दरम्यान सामने से आ रहे ट्रक से बचने के चक्कर में बाइक डिवाइडर से टकरा गई, जिससे यह हादसा हुआ।
गोरखपुर के ग्राम न्योता पोस्ट धगासरा निवासी शिक्षक ओमकार नाथ त्रिपाठी का पुत्र सुधांशु त्रिपाठी (25) झांसी के बीआईईटी में एमटेक फाइनल ईयर (मेकेनिकल) का छात्र था। वह कालेज के डा. एपीजे अब्दुल कलाम हॉस्टल में रहता था। शनिवार - रविवार की दरम्यानी रात तकरीबन दो बजे वह अपनी साथी एमटेक फाइनल ईयर के छात्र राहुल सिंह के साथ बाइक से बाहर खाना खाने के लिए निकला था। इसी दरम्यान कोंछाभांवर के पास सामने से आ रहे ट्रक से बचने के चक्कर में बाइक मोड़ दी। इससे बाइक अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। कालेज के छात्रों को खबर लगने पर वह दोनों को मेडिकल कालेज लेकर आए। यहां सुधांशु की मौत हो गई। जबकि, राहुल का इलाज जारी है।
सुधांशु को पैर और सिर में चोट आई है। उसकी मौत की वजह से सिर की चोट बनी है। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय चौकी इंचार्ज अवध नारायण पांडेय ने बताया कि मृतक छात्र हेलमेट नहीं पहने था। अगर वह हेलमेट पहने होता, तो उसकी जान बच जाती।
मेधावी छात्र था सुधांशु
सड़क दुर्घटना में मारा गया छात्र सुधांशु त्रिपाठी मेधावी छात्र था। उसके दोस्त इंजीनियरिंग के छात्र मदन मोहन ने बताया कि सुधांशु का चयन पहले आईआईटी में भी हुआ था, परंतु उसने आईआईटी न जाकर, बीआईईटी में प्रवेश लिया था। यहां वह एमटेक के साथ - साथ प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी भी कर रहा था। वह अपनी तैयारी से संतुष्ट था और उसे जल्द चयन होने की उम्मीद थी।
शनिवार को बंद रहती है मेस
बीआईईटी के डायरेक्टर प्रो. वी के त्यागी ने बताया कि शनिवार की शाम हॉस्टल की मेस बंद रहती है, जिससे छात्रों को बाहर खाना खाने जाना पड़ता है। इंस्टीट्यूट के मुख्य द्वार पर पीआरडी जवान तैनात हैं, जो देर रात छात्रों को बाहर नहीं जाने देते हैं। लेकिन, फिर भी कुछ छात्र अन्य रास्तों से बाहर निकल जाते हैं।