न मूर्ति बरामद, न चोरों की गिरफ्तारी
मड़ावरा (ललितपुर)।
तीन सप्ताह बाद भी पुलिस चोरी गईं मूर्ति का खुलासा नहीं कर सकी है। बताते चलें कि मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर धसान नदी के किनारे ऊंची पहाड़ी पर स्थित रामराजा मंदिर गिरार से 15 जुलाई की रात चोर ताले चटकाकर अष्टधातु से बनी जानकी माता की बेशकीमती मूर्ति चुराकर ले गए थे। घटना की जानकारी थाना गिरार पुलिस को दी गई, लेकिन गिरार पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया, न ही अब तक किसी नतीजे पर पहुंच सकी है।
तहसील मुख्यालय से 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गिरार गांव मध्यप्रदेश की सीमा से लगा हुआ है। धसान नदी दोनों प्रदेशों की सीमा को विभाजित करती निकली है। बदमाशों की आवाजाही पर निगरानी करने के लिए ही जंगली क्षेत्र और बार्डर के नजदीक दस्यु प्रभावित क्षेत्र गिरार गांव में थाना बनाने का सरकार द्वारा निर्णय लिया गया था। थाना बनने के बाद अपराधों पर थोड़ा अंकुश तो दिखा, लेकिन बदमाश फिर भी पुलिस की नजरों से बचकर वारदात को अंजाम देते रहते हैं। गांव के नजदीक से ही धसान नदी के किनारे पहाड़ी पर बने पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित प्राचीन प्रसिद्ध रामराजा मंदिर है। धसान नदी के किनारे हरे भरे जंगलों के बीच पहाड़ी पर स्थित होने से यहां देश विदेश से सैलानी और श्रृद्धालु आते-जाते रहते हैं। मंदिर के गर्भगृह में राम लक्ष्मण की संगमरमर की मूर्ति और सीताजी की अष्ट धातु से बनी मूर्ति स्थापित है। सामने की ओर छोटी मडिया में हनुमानजी की प्रतिमा विभाजित है। 15 जुलाई को मंदिर के पुजारी संध्याकाल के समय भगवान की आरती करके ताला लगाकर घर चले गए। 15 जुलाई की रात्रि में ही अज्ञात बदमाशों द्वारा मंदिर के बाहर के दरवाजे और गर्भ गृह के दरवाजे पर लगे तालों को तोड़कर गर्भ गृह में रखी अष्टधातु से निर्मित चार किलो वजन की सीतामाता की लाखों रुपये कीमत की मूर्ति चुरा ले गए। सुबह जब मंदिर के पुजारी ने मंदिर के मुख्य दरवाजे का ताला टूटा देखा तो उन्हें अनहोनी होने की आशंका हुई फौरन बाद वह मंदिर के अंदर जाकर देखा तो गर्भ गृह का भी ताला टूटा हुआ था और सीतामाता की प्रतिमा गायब थी। थोड़ी ही देर में यह खबर गांव में आग की तरह फैल गयी और धीरे धीरे मंदिर पर लोगों की काफी भीड़ जमा हो गई। आसपास में जानकारी करने के बाद जब कोई सफलता नहीं मिली तो ग्रामीणों ने घटना की सूचना थाना गिरार जाकर तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश यादव को दी। लेकिन घटना के 15 दिन बीतने के बाद भी बदमाशों का कोई सुराग नहीं लग पाया। इस बीच एसओ का स्थानांतरण अन्य जगह हो गया। एक सप्ताह पहले थाना गिरार का कार्यभार इंस्पेक्टर प्रभाकर मिश्रा ने संभाला है लोगों की आस्था से जुड़ी इस चोरी की वारदात को घटे एक माह का समय होने वाला है। लेकिन गिरार पुलिस बदमाशों की धरपकड़ और घटना के खुलासे के लिए गंभीर नहीं दिख रही है। घटना के संबंध में जब थानाध्यक्ष गिरार से संपर्क करना चाहा तो फोन नहीं लगा। थाने में काफी दिनों से तैनात उपनिरीक्षक जसवंत सिंह यादव से चोरी की घटना के बारे में जानना चाहा तो उन्होंने अनभिज्ञता जताते हुए फोन काट दिया।