बयान दर्ज करने गांव जाएंगे विवेचना अधिकारी
झांसी। पोस्टमार्टम हाउस में शुक्रवार को शव बदलने के मामले की विवेचना शुरू हो गई है। विवेचना अधिकारी ने पोस्टमार्टम करने वालों के बयान दर्ज किए हैं। इलाहाबाद से लौटने के बाद अब विवेचना अधिकारी दोनों मृतकों के गांव जाकर परिजनों के बयान दर्ज करेंगे। विवेचना जल्द पूरी होने की उम्मीद है।
शुक्रवार की शाम थाना एट के अमीठा गांव निवासी अरविंद का पुत्र राजकुमार (14) को ट्रक ने टक्कर मार दी थी। घायल अवस्था में उसे मेडिकल कॉलेज लाया गया। यहां उसकी मौत हो गई। मऊरानीपुर के चुरारा गांव व हाल में शिवाजी नगर में रहने वाले मुकुंदी का पुत्र उमेश (14) शुक्रवार को रात में पिता के साथ लौट रहा था। बोलेरो की टक्कर से उमेश की मौत हो गई। दोनों के शव पोस्टमार्टम हाउस में रखे गए। रात में डीएम के कहने पर उमेश के शव का पोस्टमार्टम होना था, लेकिन धोखे से राजकुमार का हो गया। बिना देखे परिवार के लोग भी शव भी ले गए और अंतिम संस्कार कर दिया था। राजकुमार का शव न मिलने पर उसके परिजनों ने शनिवार को जमकर हंगामा किया। शव की पहचान कराने के लिए पुलिस ने दोपहर करीब साढ़े तीन बजे उमेश के दादा मातादीन, पिता मुकुंदीलाल व मां मीरा ने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर शव की पहचान की थी।
वहीं, दूसरे मृतक पक्ष के लोग कार्रवाई की मांग पर अड़ गए थे, जहां देर शाम पुलिस ने शव गायब करने का मामला अज्ञात लोगाें पर दर्ज कर लिया। उधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी शिवसहाय अवस्थी ने सिटी मजिस्ट्रेट रामप्रकाश व सीएमओ डॉ. सुशील प्रकाश को जांच कर रिपोर्ट पेश करने के बाद निर्देश दिए थे। दिन भर में ही दोनों अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें पंचायतनामा भरने वाले पुलिसकर्मी व चिकित्सकों को दोषी ठहराया गया था।
जांच अधिकारी मेडिकल चौकी इंचार्ज अरविंद कुमार यादव पोस्टमार्टम कर्मियों के बयान दर्ज कर चुके हैं। इलाहाबाद से परिजनों के आने के बाद दोनों मृतकों के परिजनों के बयान लेने विवेचना अधिकारी गांव जाएंगे। इसके अलावा, सौ से अधिक लोगों से भी घटना की जानकारी ली जाएगी।
गलती से किया सबक
पोस्टमार्टम हाउस में पहली बार शव बदले जाने के बाद जिम्मेदारी नजर आने लगी है। घटना के बाद से पुलिस अधिकारी ने संबंधित पुलिसकर्मियों से सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, सीएमओ ने भी पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों व कर्मियों को भी निर्देश दिए हैं कि पूरी जिम्मेदारी के साथ ही परिजनों को शव सौंपे जाएं जिसके बाद से पोस्टमार्टम हाउस में सख्ती नजर आने लगी है।