जालौन पुलिस करेगी संजय वर्मा प्रकरण की जांच
- नवाबाद पुलिस कर रही थी जांच, डीआईजी ने दिए आदेश
- मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद से ही मुकदमे पर उठने लगे थे सवालियां निशान
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। कारोबारी संजय वर्मा पर हुए प्राणघातक हमले की जांच अब जालौन पुलिस करेगी। डीआईजी ने जालौन पुलिस को जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रकरण में कुछ लोगों को जबरन फंसाने का अंदेशा होने की वजह से यह फैसला लिया गया है।
20 जुलाई को कचहरी चौराहा के पास बदमाशों ने कारोबारी संजय वर्मा की गाड़ी पर फायरिंग कर दी थी। गोली लगने से सुरक्षाकर्मी जय उर्फ विकास की मौत हो गई थी। इसके बाद नवाबाद पुलिस ने संजय वर्मा के पुत्र संचित वर्मा की तहरीर पर कोतवाली के चतुरयाना निवासी सोनू गेड़ा, रिंकू गेड़ा, बॉबी गेड़ा और लकारा निवासी अंगद गुर्जर, प्रहलाद गुर्जर, उधम गुर्जर, राघवेंद्र गुर्जर, शिवेंद्र गुर्जर, पुष्पेंद्र गुर्जर व तीनों अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी थी। जांच पड़ताल दौरान आरोपी बॉबी गेड़ा, रिंकू ने पुलिस को साक्ष्य देकर बताया था कि दोनों भोपाल में थे, जबकि तीसरे आरोपी सोनू गेड़ा दोस्तों के साथ गोवा घूमने गए थे। तीनों आरोपियों के परिजनों ने पुलिस को मिलकर साक्ष्य व सीसीटीवी फुटेज भी दिए थे। जिसके बाद से जांच की दिशा भी बदलने लगी। मामले की पड़ताल चल रही थी, इसी बीच अलीगढ़ की टप्पल पुलिस ने बैना गांव स्थित एक मकान में दबिश दी और सागर राणा निवासी फिरोजपुर खदखोदा सोनीपत हरियाणा व रोहित उर्फ रोहिताश महोली रोड कोतवाली मथुरा को गिरफ्तारी कर लिया। पूछताछ में पता चला कि दोनों ने अपने साथियों के साथ मिलकर संजय वर्मा की गाड़ी पर फायरिंग की थी। इसके एवज में उनको बीस लाख रुपये मिलना तय हुए थे। पकड़े गए बदमाशों के खुलासे और आरोपियों की तरफ से पेश किए गए साक्ष्य के बाद नवाबाद थाने में दर्ज कराए गए मुकदमे की सत्यता पर सवालिया निशान खड़े हो गए। पुलिस भी कुछ लोगों को जबरन मुकदमे में फंसाने की बात स्वीकार कर रही है। डीआईजी सुभाष सिंह बघेल ने बताया कि मामले की जांच जालौन स्थानांतरित कर दी गई है। हर पहलु को ध्यान में रखकर निष्पक्ष जांच की जाएगी।