फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्राइम- रिटायरमेंट के बाद पकड़ी बाजीगरी, एफआईआर-City

विज्ञापन
विज्ञापन
क्राइम
विज्ञापन

--------
लेखाकार ने किया 33.52 लाख का गबन
सब हेड -- अपर आयुक्त कार्यालय में तैनात था कर्मचारी, एफआईआर
क्रासर
- मई 15 से जुलाई 17 तक उड़ाए रुपये
- दूसरे कर्मचारी ने चार्ज लिया तो पकड़ में आई गड़बड़ी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
अपर आयुक्त कार्यालय में तैनात लेखाकार श्रीराम सीहोतिया मई- 2015 से जुलाई- 2017 तक वेतन बिल की आड़ में 33.52 लाख रुपये उड़ा ले गया। इसका ‘खेल’ तब पकड़ में आया, जब सेवानिवृत्ति के बाद दूसरे कर्मचारी को उसका चार्ज मिला। आनन-फानन में सेवानिवृत्त कर्मचारी श्रीराम के खिलाफ सीपरी बाजार थाना में एफआईआर दर्ज करा दी गई और मामले की जांच राजस्व परिषद लखनऊ को सौंप दी गई है।
सीपरी बाजार स्थित पीडब्ल्यूडी कॉलोनी रायगंज निवासी श्रीराम सीहोतिया अपर आयुक्त (वित्त) कार्यालय में लेखाकार था। 31 जुलाई 17 को रिटायर होने के बाद मेवालाल साहू को चार्ज मिला तो उन्होंने कागजों का मिलान किया। तीन प्रकार के रजिस्टर (11-सी, ट्रेजरी और बिल रजिस्टर) में बिल चढ़ाने के बाद भुगतान करने का प्रावधान है, जब रजिस्टर चेक किए गए तो बिल का मिलान नहीं हो सका। लेखाकार ने अपर आयुक्त से शिकायत की। इस पर उन्होंने जांच कराई, जिसमें पता चला कि लेखाकार ने वेतन बिल के नाम पर ट्रेजरी से पांच-पांच लाख रुपये का भुगतान अपने बैंक खाते में डलवा दिया। एक बार में ऐसा नहीं किया, बल्कि मई 15 से लेकर जुलाई 17 तक आठ बार ऐसा किया। इतना ही नहीं, कर्मचारी ने एटीएम से सभी पैसे निकाल लिए। जब पूरा मिलान किया गया तो पता चला कि उसने वेतन बिल में ‘बाजीगरी’, करके 33,52,753 रुपये उड़ा दिए।
विज्ञापन


ट्रेजरी की भूमिका संदिग्ध
दो साल से यह खेल चल रहा था, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया। खास बात यह है कि इस पूरे मामले में ट्रेजरी के कर्मचारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लेखाकार वेतन बिल पास कराकर ट्रेजरी में जमा करता था, वहां से कर्मचारियों के बैंक खाते में भुगतान हो जाता था। एक बार वेतन का भुगतान करने के बाद लेखाकार उसी महीने में दोबारा वेतन बिल के नाम पर पांच से सात लाख रुपये के भुगतान करा लेता था। यह एक बार नहीं, बल्कि मई15 से लगातार 08 बार किया गया। ऐसे में ट्रेजरी के कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। अपर आयुक्त ने बताया कि इस मामले में मंडलायुक्त अमित गुप्ता के निर्देश के बाद जिलाधिकारी को भी अवगत करा कर ट्रेजरी के कर्मचारियों की भूमिका की जांच कराई जाएगी।

बैंक खाता से मिलान के बाद पकड़ी बाजीगरी
लेखाकार ने जिस तरीके से हेरफेर किया था, वह पकड़ पाना आसान नहीं था। लेकिन, जब वेतन बिल का मिलान नहीं हो सका तो अपर आयुक्त ने इसकी जांच कराने के लिए बैंक का सहयोग मांगा। एचडीएफसी बैंक से दो साल का पूरा रिकार्ड निकलवाया गया और बाजीगरी पकड़ में आ गई।

स्वीकार भी कर लिया
जब गड़बड़ी की आशंका नजर आई तो विभाग ने टेलीफोन पर श्रीराम सीहोतिया से इस संबंध में पूछताछ की। अपर आयुक्त ने बताया कि 14 अगस्त को की गई पूछताछ में श्रीराम ने एक झटके में स्वीकार कर लिया कि उसने पैसा निकाल लिया है। रिटायरमेंट के बाद के भुगतान में से पैसा काट लिया जाए। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि कर्मचारी को पूरे मामले की जानकारी थी, उसने जानबूझकर ऐसा किया।
विज्ञापन


एफआईआर करा दी गई
ट्रेजरी से पैसा निकाला गया, लेकिन कार्यालय में उस पैसे का कोई रिकार्ड नहीं मिला है। सेवानिवृत्त लेखाकार श्रीराम सीहोतिया ने कूटरचित दस्तावेजों में फर्जी हस्ताक्षर करके सीधे अपने बैंक खाते में पैसा जमा करा लिया व एटीएम से पूरा पैसा निकाल लिया। उसके खिलाफ एफआईआर करा दी गई है। कर्मचारी की तैनाती राजस्व परिषद लखनऊ से हुई थी, इसलिए जांच के लिए राजस्व परिषद को लिख दिया है।
- एमएल गुप्ता
अपर आयुक्त (वित्त)
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें