झांसी। अगवा इकलौते पुत्र के इंतजार में रो-रोकर विधवा मां की आंखें पथरा गई हैं। उनकी समझ में नहीं आ रहा कि जिंदगी के सहारे को आखिर कहां ढूंढें। उसे जमीन निगल गई या आसमान। कुछ पता नहीं चल रहा है। 111 दिन गुजरने के बाद भी पुलिस सुराग नहीं लगा सकी है। इससे पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
प्रेमनगर के रानी लक्ष्मी नगर निवासी राहुल तिवारी पुत्र स्व. राकेश तिवारी आपे चालक है। 20 दिसंबर को वह मां ऊषा तिवारी से मिलकर घर से आपे चलाने निकला। देर रात तक वह घर नहीं लौटा तो मां को चिंता हुई। 21 दिसंबर की सुबह मां ने मोबाइल फोन मिलाया, जो स्विच ऑफ मिला। मां ने उसके दोस्तों से संपर्क किया तो पता चला कि 20 दिसंबर को राहुल दो दोस्तों के साथ बस स्टैंड की तरफ जा रहा था। जब उसका पता नहीं चला तो नवाबाद थाना पुलिस ने तत्कालीन एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे के आदेश पर अपहरण का मामला दर्ज कर लिया था। उसकी तलाश में स्वॉट टीम व थाना पुलिस लग गई। जनवरी में पुलिस ने छत्तीसगढ़ की एक महिला को पकड़ा।
जिसने राहुल से प्रेम संबंध होने की बात स्वीकार की। उसने बताया कि राहुल उससे मिलने अपने दोस्त के साथ आता था। कुछ दिनों बाद दोस्त भी उससे प्यार करने लगा। उसे राहुल का मिलना बुरा लगने लगा। इसके चलते उसने दिसंबर के पहले सप्ताह में चुपचाप हंसारी में किराए पर कमरा दिलवा दिया ताकि वह राहुल से न मिल सके। महिला ने यह भी खुलासा किया था कि 20 दिसंबर की सुबह राहुल उससे मिलने चित्रा चौराहा पर आया था, जहां से उसे दो दोस्त आपे में बैठाकर ले गए थे। पुलिस जब तक कड़ी से कड़ी जोड़ती तब तक सुभाष चंद्र दुबे का स्थानांतरण हो गया। इसके साथ ही राहुल की तलाश ठंडे बस्ते में पहुंच गई।
उसकी मां कभी थाने पर तो कभी पूर्व एसएसपी सभा राज के दरबार में चक्कर काटती रही। उसे कभी आज-कल तो कभी जल्द खोजबीन कराने का आश्वासन मिलता रहा, मगर पुलिस एक कदम भी आगे नहीं बढ़ी। पुलिस की कार्यशैली से मां काफी व्यथित है। अब उसकी समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर लाडले को कहां ढूंढे। जब इस बाबत मंडी चौकी इंचार्ज से बात की गई तो उन्होंने कहा कि राहुल के मोबाइल की डिटेल निकालकर खंगालने का काम शुरू हो गया है। जिस महिला के बारे में कहा जा रहा है, वह मानसिक रूप से कमजोर नजर आती है।