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कोर्ट - बयान से पलटे मां - बेट, कोर्ट नाराज-City

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बयान से पलटे मां-बेटा, होगी कार्रवाई
झांसी। न्यायालय द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश व विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट शकील अहमद खां की अदालत में मारपीट के मामले में सुनवाई के दौरान मां- बेटे बयान से पलट गए। इस पर अदालत ने मां-बेटे पर कार्रवाई के आदेश दिए। साथ एससीएसटी मुकदमा मेें सरकार से मिलने वाले लाभ की वसूली के लिए जिलाधिकारी को निर्देश दिए। अदालत ने आरोपियों को भी बरी कर दिया।
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पैरवी कर रहे सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता बीके राजपूत के अनुसार 3 जुलाई 2011 को थाना बड़ागांव के गांव लेवा निवासी दिनेश ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि सुबह वे गांव के सरकारी हैंडपंप पर नहा था। इसी दौरान गांव के रहने वाले गजराज सिंह, पवन और छत्रपाल ने आकर पानी से भरी बाल्टी फेेंक दी। धमकाने लगे कि दलित होकर हैंडपंप पर नहा रहा है। गाली गलौज करते हुए लाठी व डंडों से मारपीट कर दी। आवाज सुनकर मौके पर पहुंची दिनेश की मां ज्ञानवती ने बचाया। तीनों धमकी देकर भाग गए। पुलिस ने धारा 323, 504, 506 और एससीएसटी एक्ट में मामला दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया था। बृहस्पतिवार को मामले की सुनवाई होनी थी। इसी बीच वादी दिनेश व उसकी मां ज्ञानवती बयान से पलट गए। इसके बाद न्यायालय ने तीनों को बरी कर दिया, लेकिन अदालत ने यह पाया कि दोनों के बयान से पलट जाने के कारण तीनों बरी हो गए। जिस पर अदालत ने मां - बेटे के खिलाफ धारा 344 की कार्रवाई के निर्र्देश दिए। मुकदमे के दौरान एससीएसटी मुकदमे में सरकार से जो लाभ पाया है, अदालत ने उसकी वसूली के लिए डीएम को भी निर्देेश दिए हैं।
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