बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में आउटसोर्सिंग से पदों की भर्ती का टेंडर एक फर्म को मिलने के बाद बुधवार को बीयू अधिकारी अपने स्तर से अभ्यर्थियों के इंटरव्यू लेने लगे। बाद में जब आरोप लगने लगे तो इंटरव्यू निरस्त कर दिया गया।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में कुछ लोगों की मनमानी चरम पर है। वह समानांतर ‘सरकार’ चलाने की कोशिश में हैं। बीयू में डाटा एंट्री ऑपरेटर, कंप्यूटर ऑपरेटर, टाइपिस्ट, लैब टेक्नीशियन, लैब अटेंडेंट, इलेक्ट्रीशियन, जनरेटर ऑपरेटर, प्लंबर, कारपेंटर, ड्राइवर, मैट्रन, लाइब्रेरी असिस्टेंट, लेबर, स्वीपर, गार्डन पदों को आउटसोर्सिंग से भरने का टेंडर कानपुर की फर्म को मिल चुका है। अनुबंध की शर्तों के अनुसार एजेंसी को ही बीयू को स्टाफ मुहैया कराना चाहिए। पूर्व में कई बार जब बीयू में सिक्योरिटी एजेंसी का टेंडर हुआ, तब फर्म ही मांग अनुसार कर्मचारी देती रही। मगर इस बार बीयू अधिकारियों ने अपने स्तर से इंटरव्यू लेने की नई व्यवस्था बना ली। आवेदक शुभम, दीपनारायण समेत कई लोगों ने बताया कि बुधवार को इंटरव्यू के लिए सुबह 11 बजे पहले बीयूआईसी बुलाया गया। फिर उन्हें ऑडीटोरियम पहुंचने के लिए कह दिया गया। दो घंटे से अधिक इंतजार करने के बाद अंत में वित्त अधिकारी कार्यालय में इंटरव्यू शुरू हुआ। इंटरव्यू शुरू होते ही प्रशासनिक भवन में मजमा लग गया। सूत्रों की मानें तो भाजपा के पदाधिकारी का बेटा भी इंटरव्यू के दौरान पहुंच गया और अधिकारियों पर मनमानी भर्ती का आरोप लगाने लगा। बाद में इंटरव्यू निरस्त तो हो गया, लेकिन इस नई प्रक्रिया ने कई सवाल जरूर खड़े कर दिए।
इस प्रकरण में कुलसचिव एसपी सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि चुने और आवेदन करने वालों को एजेंसी ने कमेटी के सामने पेश किया। बाद में आफत और बदनामी आने लगी तो ठेकेदार से कह दिया गया कि जरूरत के अनुसार वह अपने स्तर से कर्मचारी मुहैया कराए। जब उनसे पूछा गया कि नियम में भी तो यही है, तो उन्होंने कहा कि कमेटी आवेदकों को देख रही थी। क्या चेहरा देखकर प्रतिभा पता करके चयन हो रहा था, संबंधी सवाल पर बोले अब ठेकेदार ही कर्मी रखेगा। भुगतान रेगुलर मद से किया जाएगा।