निजी लैब ने कोविड की जांच के मामले में आपदा में 'अवसर' ढूंढ लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से लगातार निजी प्रयोगशालाओं पर कोविड जांच की दरों को घटाया जा रहा है, ताकि जनता को राहत मिले। वहीं, प्राइवेट लैब लूट करने पर उतारू हैं। झांसी में शासन की तरफ से निर्धारित की गई 700 रुपये की जांच 1700 रुपये में हो रही है। यानी, सीधे एक जांच पर एक हजार रुपये की मुनाफाखोरी। इस मामले में प्रशासन पूरी तरह अनजान है, वहीं स्वास्थ्य विभाग को भी कुछ होश नहीं है।
कोरोना महामारी में प्रदेश सरकार की तरफ से सरकारी खजाना खोला गया है। इसके अलावा निजी अस्पताल और पैथोलॉजी केंद्र मनमानी न कर पाएं, इस पर शासन का पूरा ध्यान है। एक दिसंबर को जारी शासनादेश में कहा गया है कि निजी क्षेत्र की प्रयोगशालाओं में कोरोना वायरस के संक्रमण की आरटीपीसीआर जांच के लिए ली जाने वाली फीस में बदलाव हुआ है।
अब निजी चिकित्सालय द्वारा निजी प्रयोगशालाओं को भेजे गए सैंपल अथवा किसी व्यक्ति द्वारा प्रयोगशाला पर जांच कोविड की जांच कराने पर 700 रुपये ही फीस ली जाएगी। इसमें जीएसटी भी शामिल है। जबकि, निजी प्रयोगशालाओं द्वारा स्वयं एकत्र किए गए सैंपल की दर 900 ही होगी। यह दर आरटीपीसीआर जांच के लिए तय की गई है। मगर जनपद की निजी लैबों में जांच के नाम पर 1700 रुपये वसूले जा रहे हैं। कभी भी जिम्मेदारों की तरफ से इस पर ध्यान नहीं दिया गया और जनता को सीधे एक जांच के नाम पर 1000 रुपये अतिरिक्त देने पड़ रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज गेट दो के सामने वसूली
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के गेट नंबर दो के सामने स्थित एक निजी अस्पताल की लैब में कोरोना की जांच होती है। अमर उजाला ने यहां जाकर स्टिंग किया तो लैब में मौजूद कर्मचारी ने बताया कि आरटीपीसीआर जांच के लिए 1600 रुपये और सैंपल कलेक्शन के 100 रुपये अतिरिक्त लगेंगे। कुल मिलाकर कोविड की जांच 1700 रुपये में हो जाएगी। जब कर्मचारी से पूछा कि रिपोर्ट कितनी देर में आएगी तो उसने कहा कि ढाई से तीन घंटे में जांच रिपोर्ट प्राप्त हो जाएगी।
महामारी अधिनियम के तहत कार्रवाई का प्रावधान
जांच के लिए निर्धारित से अधिक फीस लेना सीधे तौर पर एपीडेमिक डिजीज एक्ट 1897 और उत्तर प्रदेश महामारी कोविड-19 विनियमावली 2020 के प्रावधानों का उल्लंघन है। इसमें विधिक कार्रवाई का प्रावधान है। शासनादेश में भी इसका स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
ये बोले जिम्मेदार
यदि कोई भी निर्धारित से अधिक फीस कोरोना जांच के नाम पर वसूल रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जांच कराने वाला व्यक्ति सीधे आकर निजी लैब के बाबत शिकायत दर्ज करा सकता है। जांच में शिकायत की पुष्टि होने पर सीधे लैब को सील कर लाइसेंस निरस्त किया जाएगा।
- आंद्रा वामसी, जिलाधिकारी
कुछ नर्सिंगहोमों को कोरोना की निशुल्क आरटीपीसीआर जांच करने के लिए भी किट दी गई है। वहीं, अन्य निजी लैब में व्यक्ति जाकर कोरोना की जांच कराता है तो शासन की तरफ से 700 रुपये शुल्क निर्धारित है। यदि इससे अधिक कोई फीस वसूलता है तो कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. महेंद्र कुमार, नोडल अधिकारी कोविड