झांसी। बहुचर्चित कोविड किट घपले में शासन ने सख्त रवैया अख्तियार करते हुए एजेंसियों को किसी भी तरह के भुगतान पर रोक लगा दी है। निदेशक, पंचायती राज किंजल सिंह ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। झांसी में ही पूरे प्रदेश की सबसे महंगी कोविड किटों की खरीद हुई थी। तब से यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है।
कोविड के दौरान जून माह में शासन ने ग्राम पंचायत स्तर पर कोविड किट खरीद के निर्देश दिए थे। ग्राम पंचायतों को इन उपकरणों की खुद खरीद करनी थी लेकिन, घपलेबाजों ने मौके का फायदा उठाते हुए आपदा को अवसर में बदल दिया। बाजार से बेहद ऊंचे दामों में इनकी चुनिंदा एजेंसियों से खरीद की गई। झांसी में 479 ऑक्सीमीटर, इंफ्रारेड थर्मामीटर के साथ सैनिटाइजर, ग्लव्ज, मास्क आदि खरीदे गए। एक किट की कीमत करीब 15,000-18000 के बीच रही। बाजार में जो ऑक्सीमीटर 1000-1500 रुपये तक में आसानी से मिल रहे थे उनको करीब 3349 रुपये में खरीदा गया। 1500 रुपये में मिलने वाले इंफ्रारेड थर्मामीटर 4500 रुपये में खरीदे गए।
इसी तरह ग्लव्ज, सैनिटाइजर एवं मास्क के लिए भी अधिक कीमत चुकाई गई। पड़ोस के ललितपुर में ऑक्सीमीटर 1500 रुपये में ही खरीदा गया। बाजार से बेहद ऊंचे दाम में हुई इस खरीद का सबसे पहले अमर उजाला ने खुलासा किया। इस मामले में हंगामा होने पर सरकार ने एसआईटी जांच शुरू कराई। एसआईटी की रिपोर्ट में भी झांसी में सर्वाधिक ऊंची कीमत में खरीद की पुष्टि हुई। जांच रिपोर्ट शासन के पास विचाराधीन है। इसी बीच निदेशक किंजल सिंह ने अब सभी एजेंसियों के भुगतान पर रोक लगा दी हालांकि गड़बड़ी उजागर होने के बाद ही यहां पर भुगतान पर रोक लगा दी गई थी लेकिन, अब निदेशक के आदेश के बाद एजेंसियों पर शिकंजा और भी कस गया है।