झांसी। कोविड-19 के प्रोटोकाल के तहत विकास भवन में भी कोविड हेल्प डेस्क स्थापित की गई है लेकिन, वह बेअसर नजर साबित हो रही है। शुक्रवार को भी विकास भवन में दो कर्मचारी कोविड संक्रमित पाए गए। यह कर्मचारी टेस्ट कराने से पहले पूरे समय काम करते रहे। ऐसे में सवाल उठ रहे कि अगर आखिर बीमार होने के बावजूद उनको कार्यालय के भीतर काम करने की इजाजत कैसे मिली।
लॉकडाउन के बाद जब सरकारी कार्यालय खोले गए तब पचास फीसद कर्मचारियों का रोस्टर बनाकर काम करने के निर्देश दिए गए थे। इस संबंध में अपर प्रमुख सचिव की ओर से मई में शासनादेश भी जारी किया गया लेकिन, विकास भवन प्रशासन इस शासनादेश को लेकर गंभीर लापरवाही बरत रहा। विकास भवन में स्थित करीब 18 विभागों के करीब पांच सौ से अधिक कर्मचारी रोजाना कार्यालय आ रहे हैं। इस वजह से कोविड का प्रसार यहां तेजी से हो रहा है। अब तक छह कर्मचारियों को कोविड अपनी चपेट में ले चुका। इसके बढ़ते प्रसार से कर्मचारियों में भी खौफ है लेकिन, प्रशासनिक कार्रवाई के डर से कर्मचारी खुलकर एतराज भी नहीं जता पा रहे। शुक्रवार को भी दो कर्मियों के पुष्टि होने के बाद इनकी संख्या बढ़कर छह हो गई। इससे कर्मचारियों में खौफ पैदा हो रहा है।
एक-दो कमरे में ही चलते हैं कई विभाग
विकास भवन में कई कार्यालय ऐसे हैं जहां एक-दो कमरे में ही पूरा स्टॉफ बैठता है। ऐसे में अगर उनमें से एक भी संक्रमित हुआ तब उस विभाग के अधिकांश कर्मचारियों के चपेट में आने की आशंका सर्वाधिक रहेगी। समाज कल्याण विभाग, पशुपालन विभाग, सहकारिता विभाग, मनरेगा सेल, लघु सिंचाई जैसे तमाम विभाग सिर्फ एक दो कमरे में ही चल रहे हैं जबकि यहां एक दर्जन तक कर्मचारी काम करते हैं।
निश्चित तौर पर रोस्टर बनाया गया होगा लेकिन, इसे लागू कराए जाने को लेकर अभी मैं कुछ नहीं कह सकता है। शासनादेश का पालन अनिवार्य तौर पर कराया जाएगा।
शैलेष कुमार, मुख्य विकास अधिकारी