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महंगी कोरोना किट की खरीद का जिम्मेदार कौन?

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झांसी। बहुचर्चित कोरोना किट खरीद मामले में एसआईटी के नए सवालों ने अफसरों की उलझनें बढ़ा दी है। एसआईटी ने बीस बिंदुओं को लेकर अफसरों से फिर से जवाब मांगा है। इस बार सीधा सवाल करते हुए एसआईटी ने पूछा आखिरकार कोरोना किट की खरीदारी किसकी ओर से हुई। अफसरों को परेशानी यह है कि जवाब में जिसका नाम बताया जाएगा, उसकी ही जवाबदेही तय होगी।
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कोविड किट घपले की जांच कर रही प्रमुख सचिव रेणुका कुमार की अगुवाई वाली एसआईटी ने पहले बारह बिंदुओं पर जवाब तलब किए थे। लेकिन इनके जवाब से वह पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। ऐसे में अब बीस नए सवाल फिर से भेजे गए हैं। नए सवालों में एसआईटी ने यह साफ करने को कहा है कि आखिर खरीद किसकी ओर से हुई। पंचायतों ने पल्स ऑक्सीमीटर एवं इंफ्रारेड थर्मोमीटर की खरीद खुद की अथवा इनको ब्लॉक एवं जिला स्तर पर खरीदा गया। एसआईटी के इस सीधे सवाल ने अफसरों के होश उड़ा दिए। इसके पहले एसआईटी ने सिर्फ खरीद प्रक्रिया को लेकर ही सवाल पूछे थे। लेकिन खरीद की जवाबदेही को लेकर कोई सवाल नहीं पूछा था। अब इसके जवाब में जिसका भी नाम लिया जाएगा, उसकी जवाबदेही भी तय हो जाएगी। इस सवाल ने अफसरों में बेचैनी भर दी है। इसके अलावा एसआईटी ने ग्राम पंचायत स्तर पर पूरी जानकारी देने को कहा है। इन उपकरणों को खरीद के लिए किस निधि का इस्तेमाल किया गया, इसे बताने के लिए भी कहा है। इसके अलावा किट में शामिल उपकरणों के अलग-अलग दाम के साथ ही पूरा ब्योरा भी देने को कहा है। सूत्रों की मानें इसमें खरीद की जवाबदेही तय करने के साथ ही उपकरणों की कीमत साबित करने में सबसे बड़ी समस्या पेश आ रही है। फिलहाल एसआईटी को जवाब देने के लिए तैयारी की जा रही है। बता दें, पूरे प्रदेश में झांसी में सबसे अधिक कीमत पर कोरोना किट खरीदी गई। यहां कुल 479 किट मंगवाई गई जिनमें ऑक्सीमीटर 3990 रुपये एवं थर्मल स्कैनर 4500 रुपये प्रति नग की दर से मंगवाए गया। हालांकि इनका भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। इन उपकरणों की गुणवत्ता की भी परवाह नहीं की गई।
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