ऑक्सीजन लेवल 82 प्रतिशत होने पर तुरंत ऑक्सीजन लगा दी गई। भर्ती होने के दो घंटे बाद ही सैंपल ले लिया गया। पॉजिटिव रिपोर्ट की जानकारी होने पर मरीज विचलित हो गए और कहने लगे कि अब नहीं बचेंगे।
वह घर वालों को साथ रखने की जिद करने लगे। उनके तीमारदार को लगातार मरीज की सेहत के बारे में जानकारी दी जा रही थी। वह मधुमेह से पीड़ित थे और एक्सरे में एआरडीएस के बदलाव बढ़ रहे थे।
इसके मद्देनजर 26 जुलाई को उन्हें टॉक्लीजूमेब इंजेक्शन लगाया गया। रेमडेसिविर भी लगाना शुरू किया गया। अनियंत्रित मधुमेह और गिर रहे ऑक्सीजन सेचुरेशन के कारण उन्हें वेंटीलेटर पर डालना पड़ा। सीपैपे वेंटिलेटर लगाया गया।
तब भी ऑक्सीजन की कमी पूरी नहीं हुई तो इनवेसिव वेंटीलेटर लगाया गया। उनकी मौत के बाद भी तीमारदारों ने इलाज को लेकर कोई शिकायत नहीं की। मगर इस तरह के निगेटिव दृष्टिकोण के वीडियो वायरल होने से डॉक्टर और कर्मचारी आहत हैं, क्योंकि वह खुद और अपने परिवार की परवाह किए बिना नियमित रूप से दिन-रात कोविड मरीजों की सेवा में लगे हुए हैं।