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बीमारी से ज्यादा सता रहा है कोरोना जांच का डर

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झांसी। जिला अस्पताल की ओपीडी में परामर्श से पहले कोरोना जांच अनिवार्य किए जाने के बाद अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या काफी घट गई है। आलम यह है कि पर्चा काउंटर पर एक दिन में सर्वाधिक दो सौ से अधिक का आंकड़ा पार नहीं किया जा सका है। जबकि गली मुहल्लों के क्लीनिकों में लोगों की काफी भीड़ जमा हो रही है।
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कोरोना काल से पहले अस्पताल की ओपीडी में शहरी व ग्रामीण इलाकों से पंद्रह सौ से अधिक मरीज इलाज कराने के लिए आते थे। वहीं बीमारियों का सीजन शुरू होने पर आंकड़ा दो हजार के पार हो जाता था। लोगों को पर्चा बनवाने के साथ ही ओपीडी में चिकित्सक को दिखाने के लिए लंबी-लंबी कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता था। लेकिन कोरोना काल के दौरान अस्पताल की ओपीडी को बंद कर सिर्फ इमरजेंसी सेवाओं को जारी रखा गया था। 23 सितंबर को शासनादेश जारी कर प्रदेश भर की ओपीडी को शुरू करने का आदेश दिया गया था। जिसके चलते जिला अस्पताल में 24 सितंबर को ओपीडी की शुरूआत की गई थी। लेकिन ओपीडी का पर्चा बनाने से पहले कोरोना जांच को अनिवार्य कर दिया गया था। इस कारण मरीजों की संख्या में लगातार कमी देखी जाने लगी है। लोगों में कोरोना जांच के डर का आलम यह है कि सामान्य ओपीडी को शुरू हुए तीन महीने से भी अधिक समय गुजर गया है लेकिन अभी तक अस्पताल की ओपीडी में दो सौ से अधिक मरीज इलाज कराने के लिए नही पहुंचे हैं। जबकि गली मुहल्लों व निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों की भरमार है।
इस संबंध में अस्पताल के सीएमएस डॉ. केके गुप्ता ने बताया कि यह सही है कि मरीजों की संख्या में गिरावट आई है। कोरोना जांच होने के बाद कम मरीज अस्पताल आ रहे हैं। लेकिन, अस्पताल में करोना जांच मरीजों व उनके परिवार के लिए हितकारी है। इससे समय रहते कोविड महामारी से बचाव व इलाज संभव है। जागरूक हो कर सभी को इस महामारी में कदम से कदम मिलाकर चलना चाहिए। स्वास्थ्य कर्मियों का भी सहयोग करना चाहिए।
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